NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया. इस घटनाक्रम के बाद सरकार और विपक्ष के बीच परीक्षा प्रणाली तथा छात्रों के मुद्दे पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.
मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास की ओर विरोध मार्च निकाल रहे थे. यह मार्च NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों के समर्थन में आयोजित किया गया था. प्रदर्शनकारियों का काफिला आगे बढ़ा तो दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कई नेताओं को हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं.
प्रदर्शन से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई पूरे देश के परिवारों से जुड़ा मुद्दा है और उनकी आवाज को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए. राहुल गांधी ने लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों के समर्थन में आगे आने का आग्रह किया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग उठाना है.
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से राहुल गांधी से बातचीत की गई थी. उनके अनुसार, सरकार ने NEET और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए सहमति जताई. उन्होंने दावा किया कि बाद में राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अतिरिक्त मांग भी रख दी. सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना चाहती है.
घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि संसद में चर्चा के लिए उसका रुख स्पष्ट है. उधर, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित नियमों का पालन कराने के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही है. फिलहाल NEET-UG 2026 विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और आने वाले दिनों में संसद के भीतर तथा बाहर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है.