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Pune Porsche crash: जलेबी से ज्यादा घूम रहा है केस, डॉक्टर के बाद अब आरोपी की मां को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Pune Porsche crash: पुणे पोर्श क्रैश मामले में अब और नया ट्विस्ट सामने आया है जिसमें ससून जनरल हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों की ओर से आरोपी का ब्लड सैंपल बदलने की बात सामने आने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं गिरफ्तार किए गए डॉक्टर्स ने अब आरोपी की मां को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है जिससे इस पूरे मामले में एक और ट्विस्ट आ गया है.

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Pune Porsche Accident
Courtesy: Social Media/Twitter

Pune Porsche crash: पुणे के पोर्श हादसे मामले में एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है, जिसने शहर को हिला कर रख दिया है. इस मामले में दो इंजीनियर्स की मौत हो गई थी. जांच में एक चौंकाने वाली साजिश का पता चला है, जिसमें ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टर और एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उन्होंने उस नाबालिग आरोपी के ब्लड सैंपल में हेरफेर की, जो कि हादसे को अंजाम देने के बाद लिया गया था.

रिपोर्ट में हेरफेर के लिए की गई साजिश

जांच में पता चला है कि खून के असली सैंपल को बदलकर उसकी मां के सैंपल से बदल दिया गया, ताकि यह छिपाया जा सके कि नाबालिग शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था. गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों में फॉरेंसिक साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तावरे और कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्रीहरी हलाने शामिल हैं. साथ ही मुर्दाघर का एक कर्मचारी भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.  

पुलिस का कहना है कि ये तीनों लोग नाबालिग कार चालक के पिता के कहने पर काम कर रहे थे, जो शहर का एक रईस बिल्डर है. आरोप है कि बिल्डर ने एक "बिचौलिए" की मदद ली (जिसकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है)  जिसने डॉक्टरों से संपर्क करवाया.  उनका मकसद शराब जांच की रिपोर्ट में हेरफेर करना था. यह रिपोर्ट यह निर्धारित करती कि क्या 17 साल का लड़का शराब के नशे में था, जब उसने तेज रफ्तार पोर्शे टेक्कान से एक मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी और उसमें 2 निर्दोष लोगों की जान चली गई.

पुलिस ने पकड़ी ब्लड सैंपल में हेर-फेर की बात

यह गिरफ्तारियां तब हुईं, जब पुलिस को जांच के दौरान ससून अस्पताल और औंध स्थित एक अन्य अस्पताल से किशोर के ब्लड सैंपल्स की रिपोर्ट मिली. दोनों ही रिपोर्ट्स में खून में अल्कोहल की मात्रा न के बराबर पाई गई. ये रिपोर्ट्स संदेहास्पद लगीं, जिसके बाद पुलिस ने और गहराई से जांच की. साथ ही फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला से नाबालिग और उसके पिता की डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की रिपोर्ट भी हासिल की गई. डीएनए जांच के नतीजे और खून की रिपोर्ट्स में गड़बड़ी सामने आईं, जिसने पुलिस को असली खेल की ओर इशारा किया.

पुणे के पुलिस कमिश्नर अमिताभ कुमार ने कहा, 'हमारी जांच से पता चला है कि दुर्घटना के बाद, बिल्डर ने घाटकेम्बले से संपर्क करने के लिए एक बिचौलिए को काम पर रखा था (जिसकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है). इसके बाद घाटकेम्बले ने 19 मई को सुबह करीब 10 बजे बिल्डर का तावरे से संपर्क करवाया. बिल्डर के बंगले से जब्त किए गए फोन की जांच में पता चला है कि उसने तावरे को एक नियमित कॉल किया था और बाद में एक एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके 20 और कॉल किए.'

मां के खून से बदला था बेटे का ब्लड सैंपल

जांच में खुलासा हुआ कि हादसे के बाद, बिल्डर ने कथित तौर पर उस बिचौलिए को काम पर रखा था, जिसने डॉक्टरों से संपर्क करने में अहम भूमिका निभाई. बिल्डर ने डॉक्टर तावरे को फोन किया और बाद में एक एप्लीकेशन के जरिए कई और कॉल किए,  जिससे यह साफ होता है कि दोनों के बीच किसी साजिश को अंजाम देने की बातचीत हो रही थी.  पूछताछ में डॉ हलाने ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें डॉ तावरे से तीन लाख रुपये मिले थे.  हलाने ने ही असली ब्लड सैंपल को फेंक दिया और उसे नाबालिग की मां के ब्लड सैंपल से बदल दिया था.

यह मामला देशभर में सुर्खियों में छा गया है और इस हादसे में न्याय की मांग कर रहे लोगों को उम्मीद जगाई है.  पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और वे उस बिचौलिए की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि डॉक्टरों और बिल्डर के बीच हुई  इस साजिश में कोई और लोग शामिल तो नहीं थे. कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्रीहरी हलाने ने स्वीकार किया है कि उन्हें डॉ. तावरे से 3 लाख रुपये मिले थे. हलाने ने ही नाबालिग के ब्लड सैंपल को कूड़ेदान में फेंक दिया था और उसे उसकी मां के ब्लड सैंपल से बदल दिया था.