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'लाठियां और गोलियां काफी नहीं थीं, प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिरा दी...', PM मोदी पर भड़क गए डॉ. मनमोहन सिंह

Manmohan Singh on PM Modi: देश में लोकसभा चुनाव के आखिरी दौर के लिए चुनाव प्रचार 30 मई शाम 6 बजे खत्म होने वाला है. इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने PM मोदी को लेकर बयान दिया है और उन पर निशाना साधा है.

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Manmohan Singh on PM Modi
Courtesy: Social Media

Manmohan Singh on PM Modi: देश में लोकसभा चुनाव 2024 आखिरी चरण से पहले आज नेताओं और पार्टियों के लिए आखिरी मौका है. आज यानी 30 मई, दिन गुरुवार को शाम 6 बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा. इससे पहले नेता अपनी पूरी जोर आजमाइश कर रहे हैं. आखिरी चरण के मतदान से पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वोटरों से खास अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने PM मोदी के भाषा और नीतियों पर भी निशाना साधा है.

अपनी बात रखने के लिए मनमोहन सिंह ने पंजाब के मतदाताओं एक नाम एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने अग्निवीर योजना, शक्ति, शौर्य और सेवा के साथ नकली राष्ट्रवाद के बारे में लिखा है. उन्होंने लिखा कि नरेंद्र मोदी पहले ऐसे PM हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री पद की गंभीरता को कम किया है.

पंजाब के वोटरों से अपील

पंजाब के लोगों से वोट अपील करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि आपके लिए कांग्रेस ही एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेगी और देश के लोकतंत्र, संविधान की रक्षा करेगी. उन्होंने कहा कि आप विकास और समावेशी प्रगति के साथ ही प्रेम, शांति, भाईचारे और सद्भाव के लिए वोट करें. उन्होंने पीएम मोगी से पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव अभियान के दौरान राजनीतिक चर्चाओं पर बारीकी से नजर रखी है.

प्रधानमंत्री की असंसदीय भाषा

अपने पत्र में मनमोहन सिंह ने लिखा कि इस पूरे चुनाव में मोदीजी ने घृणास्पद भाषण दिए हैं. ये लोगों को अलग थलग करने वाला है. मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री है जिनके कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री पद की गंभीरता कम  हुई है. ये खास वर्ग या विपक्ष को निशाना बनाने के लिए घृणित, असंसदीय और निम्न स्तरीय भाषा का उपयोग करते हैं. ऐसा कतई नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने तो मुझे लेकर भी गलत बयान दिए हैं.

पंजाब को बदनाम किया

मनमोहन सिंह ने अपने पत्र में बीजेपी सरकार ने पंजाब और पंजाबियत को बदनाम किया है. इसके लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. उनके फैसले के चक्कर में पंजाब के 750 किसान शहीद हो गए. उन्हें आंदोलन जीवी और परजीवी तक कहा गया. वो महीनों तक दिल्ली की सीमा में इंतजार करते रहे लेकिन सरकार ने उनकी  समय पर नहीं सुनी.