नई दिल्ली: पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है. नामांकन दाखिल करने की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सोमवार को सीटों के बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप दे दिया. यह गठबंधन पुडुचेरी में अपनी खोई हुई सत्ता वापस पाने के इरादे से मैदान में उतरा है. दोनों दलों के बीच हुई यह सहमति 'इंडिया' ब्लॉक की एकजुटता और रणनीतिक मजबूती को दर्शाने की एक कोशिश है.
कांग्रेस और डीएमके के बीच हुए इस समझौते के तहत, कुल 30 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 16 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारेगी. वहीं, डीएमके को 14 सीटें आवंटित की गई हैं. डीएमके अपने हिस्से की सीटों में से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) को भी उम्मीदवार उतारने का मौका देगी. यह समझौता पुडुचेरी कांग्रेस के प्रमुख वी वैथिलिंगम और डीएमके नेता एस जगतरक्षकन के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद तय किया गया है.
चुनाव की सबसे चर्चित लड़ाई थट्टनचावड़ी विधानसभा क्षेत्र में होने जा रही है. यहां से कांग्रेस के मौजूदा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री वी वैथिलिंगम ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है. उनका मुकाबला सीधे तौर पर पुडुचेरी के वर्तमान मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी से होगा. वैथिलिंगम पहले भी दो बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक मौजूदा मुख्यमंत्री के बीच होने वाला यह मुकाबला इस सीट को पूरे प्रदेश की सबसे हॉट सीट बना रहा है.
अगर 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें, तो कांग्रेस के लिए नतीजे उत्साहजनक नहीं थे. उस समय कांग्रेस 14 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन वह केवल 2 सीटें ही जीत पाने में सफल रही थी. दूसरी तरफ, डीएमके ने 13 में से 6 सीटों पर कब्जा जमाया था. एनडीए गठबंधन की प्रमुख पार्टी एआईएनआरसी 10 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी. भाजपा ने भी पिछले चुनाव में 6 सीटें जीतकर अपनी स्थिति काफी मजबूत की थी.
कांग्रेस-डीएमके गठबंधन इस बार पुडुचेरी की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद कर रहा है. रणनीतिकारों का मानना है कि वैथिलिंगम जैसे अनुभवी नेता को मुख्यमंत्री के खिलाफ उतारना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है. डीएमके नेता जगतरक्षकन ने स्पष्ट किया है कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे और भाजपा-एआईएनआरसी गठबंधन को कड़ी चुनौती देंगे. विपक्षी दलों का लक्ष्य एनडीए के बहुमत को रोकना और प्रदेश में फिर से अपनी सरकार बनाना है, जो 2021 में सत्ता से बाहर हो गई थी.
आपको बता दें कि पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा. मतदाताओं के फैसले का पता 4 मई को चलेगा, जब चुनाव आयोग वोटों की गिनती करेगा. उल्लेखनीय है कि पुडुचेरी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के चुनाव परिणाम भी इसी दिन घोषित किए जाएंगे. थट्टनचावड़ी सहित सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन के बाद चुनावी प्रचार अब अपने चरम पर पहुंचने वाला है और सभी दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.