नई दिल्ली: मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रही है. सूत्रों के अनुसार आगामी संसदीय सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया जा सकता है. इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्तों से पूरी तरह अलग करना है. इससे आरक्षण का लाभ महिलाओं को 2029 के बजाय बहुत पहले ही मिलना शुरू हो जाएगा.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के पारित होने के समय यह प्रावधान था कि इसे अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही प्रभावी बनाया जाएगा. कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना नहीं हो पाई थी, जिसके चलते 2011 के आंकड़ों के आधार पर इसे लागू करना संभव नहीं था. यही कारण था कि आरक्षण के लिए 2029 का लक्ष्य रखा गया था. अब सरकार कानून में संशोधन कर इन शर्तों को हटाना चाहती है ताकि यह प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सके.
गृह मंत्री अमित शाह इस महत्वपूर्ण बदलाव के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं. सोमवार को उन्होंने एनसीपी, सपा, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाकात की. इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) और एआईएमआईएम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. सरकार का प्रयास है कि इस संशोधन पर व्यापक सहमति बने ताकि संसदीय कार्यवाही के दौरान कोई बाधा न आए. कांग्रेस और टीएमसी के साथ भी आगामी दिनों में चर्चा होने की पूरी संभावना है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर मांग की है कि विधेयक को संसद में पेश करने से पहले एक औपचारिक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. विपक्ष चाहता है कि इस पूरी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए. खड़गे का मानना है कि इतने दूरगामी प्रभाव वाले कानून पर चर्चा सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह गहनता से होनी आवश्यक है.
सरकार की योजना के अनुसार अगले सप्ताह ही संसद में संशोधन विधेयक लाया जा सकता है. इस बिल के कानून बनने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनावों से ही महिला कोटा लागू हो जाएगा. वर्तमान में इन दोनों राज्यों में चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. महिलाओं को आरक्षित सीटें मिलने से चुनावी रणभूमि का नजारा पूरी तरह बदल जाएगा. यह संशोधन भाजपा के लिए एक बड़ा चुनावी कार्ड भी साबित हो सकता है.
एनडीए सरकार ने 27 साल से लटके इस बिल को विशेष सत्र बुलाकर ऐतिहासिक बहुमत से पारित किया था. इसे 'नारी शक्ति वंदन' नाम देकर सरकार ने महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया था. अब जनगणना और परिसीमन की बंदिशों से इसे आजाद करना सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है. 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज अधिक मुखर होगी. यह कदम भारतीय राजनीति में लैंगिक समानता की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है.