बिहार में हालिया उपचुनाव में सफलता के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में हैं. गुरुवार को उन्होंने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की प्रमुख सुनेत्रा पवार से दक्षिण मुंबई स्थित उनके आधिकारिक आवास 'देवगिरी' में करीब पांच घंटे तक मुलाकात की. पिछले तीन महीनों में यह दोनों नेताओं की दूसरी बैठक है. इससे पहले मई में भी दोनों के बीच मुलाकात हुई थी. लगातार हो रही इन बैठकों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलों को हवा दे दी है.
एनसीपी के महासचिव संजय खोडके ने दोनों नेताओं की मुलाकात की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के विषय का खुलासा नहीं किया. माना जा रहा है कि इस बैठक की पहल सुनेत्रा पवार के बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार ने की थी. मई में हुई पहली मुलाकात के बाद भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हुई थीं. उस समय पार्थ पवार ने कहा था कि प्रशांत किशोर परिवार के करीबी हैं और उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि एनसीपी अपनी संगठनात्मक और चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए प्रशांत किशोर की विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहती है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में रणनीति तैयार करने वाली अपनी पूर्व सलाहकार संस्था से दूरी बना ली है. हालांकि प्रशांत किशोर अब अपनी राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC के दैनिक संचालन में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि वह अब भी रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हाल के दिनों में एनसीपी और बीजेपी के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं. वहीं, शरद पवार गुट और एनडीए के बीच संभावित नजदीकियों की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस मुलाकात को एनसीपी का आंतरिक मामला बताते हुए इतना जरूर कहा कि कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे महायुति गठबंधन में दरार आए.
सुनेत्रा पवार ने 2024 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. लोकसभा चुनाव में उन्हें बारामती सीट पर हार का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में उपचुनाव में उन्होंने विधानसभा सीट जीत ली. ऐसे में लगातार दूसरी बार प्रशांत किशोर से उनकी मुलाकात को केवल औपचारिक बैठक नहीं माना जा रहा है. हालांकि दोनों पक्षों ने किसी राजनीतिक समझौते या रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई संभावनाओं पर चर्चा जरूर तेज कर दी है.