Pragya Thakur gave a controversial statement: भोपाल की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर अक्सर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में रखती है. एक बार फिर उन्होंने विवादित बयान देखर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है. हाल ही में भोपाल में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान, ठाकुर ने माता-पिता से अपनी बेटियों को 'गैर-हिंदुओं' के घर जाने से रोकने की अपील की और धमकी दी कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके पैर तोड़ दिए जाएंगे. कांग्रेस ने उनके बयान की निंदा की है.
अपने बयान में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि अपने मन को इतना मजबूत बनाइए कि अगर हमारी बेटी हमारी बात न माने और किसी गैर-हिंदू के घर चली जाए, तो उसके पैरों को तोड़ने तक की सख्त कार्रवाई करने में पीछे न हटें. जो हमारे मूल्यों का पालन नहीं करते और माता-पिता की बात नहीं सुनते, उन्हें सजा मिलनी चाहिए. यदि बच्चों की भलाई के लिए उन्हें मारना पड़ता है, तो झिझकना नहीं चाहिए.
बच्चों के प्रति हिंसा को प्रोत्साहित
उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता को अपनी बेटियों पर नजर रखनी चाहिए, विशेषकर उन पर जो परिवार के मूल्यों का पालन नहीं करती हैं, बुजुर्गों का सम्मान नहीं करती हैं, और घर छोड़कर भागने की योजना बनाती हैं. उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि ऐसे बच्चों को रोकने के लिए प्यार, समझाने, डांटने या आवश्यकतानुसार मार-पीट करने से पीछे न हटें.
"Break legs of your daughters if she marries a non-Hindu."
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) October 19, 2025
- BJP leader Sadhvi Pragya Thakur pic.twitter.com/rFcDrM3Tsb
इस विवादित बयान पर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला किया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पार्टी और उसके नेता समाज में “घृणा और विभाजन” फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं, बल्कि समाज में असुरक्षा और डर की भावना भी पैदा करते हैं.
इस बयान ने समाज में लड़कियों के अधिकार और उनके सुरक्षित विकास को लेकर बहस को भी तेज कर दिया है. कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि बच्चों के प्रति हिंसा को प्रोत्साहित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बयान सामाजिक धारा में भय और असुरक्षा को बढ़ाते हैं, और माता-पिता के साथ-साथ समाज को भी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी कि बच्चों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों का सम्मान करना ही एक स्वस्थ और समृद्ध समाज की पहचान है.