Pune Shaniwar Wada Incident: पुणे के शनिवार वाड़ा में तीन मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज पढ़ने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. महिलाओं द्वारा किले में नमाज पढ़ने की बाद भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद ने उस पूरे क्षेत्र (जिसमें तीनों महिलाओं ने नमाज पढ़ा) को गौमूत्र से साफ किया.
भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ऐसा करने के कुछ घंटे बाद ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास पहुंची और स्थिति को सब के सामने रखा. कुलकर्णी ने अपने द्वारा किए गए एक्शन का बचाव करते हुए अधिकारियों से महिलाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है.
कुलकर्णी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को शनिवार वाड़ा जैसी जगह पर नमाज़ अदा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. शनिवार वाड़ा नमाज़ अदा करने की जगह नहीं है. हम प्रशासन से इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं. हालांकि, कुलकर्णी के कृत्य की भाजपा के सहयोगी दलों एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने आलोचना की है. शिंदे सेना की नीलम गोरहे ने एक बयान में कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि शनिवार वाड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है.
शनिवार वाड्यात नमाज पठण चालणार नाही, हिंदू समाज आता जागृत झाला आहे ! 🚩🚩
— Dr. Medha Kulkarni (@Medha_kulkarni) October 19, 2025
🚩चलो शनिवार वाडा! 🚩
रविवार, 19 ऑक्टोबर 2025
📍 शनिवार वाडा, कसबा पोलीस चौकीसमोर
🕓 सायंकाळी 4 वाजता
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🔥 पुण्याचे वैभव – शनिवार वाडा
ऐतिहासिक वारसा स्थळ की गैर हिंदू प्रार्थना स्थळ?
सारसबाग येथे… pic.twitter.com/EObcXMZ6Rt
एनसीपी की रूपाली पाटिल थोम्ब्रे ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा है कि सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए कुलकर्णी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए. कुलकर्णी की कार्रवाई पर कई सामाजिक समूहों ने भी सवाल उठाए हैं. मामले पर एक्शन लेते हुए एएसआई ने पूरी घटना के संबंध में मामला दर्ज किया है. पुलिस ने कहा कि वह एएसआई से भी बात करेगी क्योंकि शनिवार वाड़ा उसके संरक्षण में है. पीटीआई ने पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले के हवाले से कहा कि हम एएसआई से बात करेंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई करेंगे. बता दें कि शनिवार वाड़ा 1736 में पेशवाओं द्वारा बनाया गया एक 13 मंजिला महल था. इसे पेशवा शक्ति के केंद्र और पुणे के इतिहास और संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है और लोग इसका सम्मान करते हैं. हालांकि 1828 में लगी आग में यह नष्ट हो गया था. अब इस स्थल पर केवल किले की दीवारें और विशाल कील-जड़ित दरवाजे ही बचे हैं.