नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रील और सामाजिक माध्यमों की दुनिया में सक्रिय युवाओं को महत्वपूर्ण सलाह दी है. उन्होंने कहा कि आज रील का दौर है और सामाजिक माध्यमों पर चर्चित लोग युवाओं को कई दिशाओं में आकर्षित करते हैं. ऐसे समय में युवाओं को रेलवे स्टेशनों पर लिखी चेतावनी याद रखनी चाहिए कि छोटा रास्ता कभी-कभी नुकसान पहुंचा सकता है. उन्होंने युवाओं से जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत, धैर्य और संघर्ष को महत्व देने की अपील की. प्रधानमंत्री मोदी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की और कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन के संघर्षों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. उन्होंने रामनाथ कोविंद के जीवन को इसका उदाहरण बताया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज रील का दौर है और सामाजिक माध्यमों पर चर्चित लोग युवाओं को अपनी ओर खींचते हैं. लेकिन इस दौर में भी मेहनत का महत्व कम नहीं हुआ है. उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर लिखी चेतावनी का उदाहरण देते हुए युवाओं को समझाया कि शॉर्टकट से बचना जरूरी है. उनका संदेश था कि जीवन में जल्दी सफलता पाने के चक्कर में सही रास्ते को नहीं छोड़ना चाहिए.
Speaking at the release of 'Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles,' the autobiography of former President Shri Ram Nath Kovind Ji. His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation.@ramnathkovind
— Narendra Modi (@narendramodi) August 12, 2026
https://t.co/SCsPxznLG7
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना जारी रखा. उन्होंने युवाओं से कहा कि युवाओं की सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन संघर्षों से भी बनती है जो व्यक्ति रास्ते में झेलता है.
प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के बचपन के उस दुखद दौर को भी याद किया, जब उन्होंने कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था. उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में मां को खोना कितना पीड़ादायक रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है. इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी मां को भी याद किया और उनके लंबे जीवन का जिक्र किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर अपनी सफलता का श्रेय खुद लेते हैं, लेकिन मुश्किल आने पर समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं. इसके उलट भारतीय मूल्यों से प्रेरित व्यक्ति समाज के सकारात्मक योगदान को स्वीकार करता है. उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद की आत्मकथा इसी सोच का उदाहरण है. उनके संघर्ष निजी जरूर हैं, लेकिन उनसे मिली सफलता देश के लोकतंत्र और गणराज्य से जुड़ी है.
प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी कोविंद ने खुद को सार्वजनिक मुद्दों से अलग नहीं किया. एक देश, एक चुनाव जैसे विषय पर उनके काम का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान भारतीय लोकतंत्र में नया अध्याय खोल सकता है.
प्रधानमंत्री की बातों का सार युवाओं के लिए स्पष्ट था;