नई दिल्ली: 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली. यह दिन देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में शामिल है. आजादी के बाद भारत के सामने एक नए राष्ट्र के रूप में खुद को मजबूत करने की चुनौती थी. इसी दौर में देश ने शासन व्यवस्था, लोकतंत्र और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े कई महत्वपूर्ण पड़ाव पहली बार देखे.
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. उन्होंने 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. उनके नेतृत्व में आजाद भारत की पहली सरकार बनी. इस सरकार में सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे.
26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. इससे पहले वे संविधान सभा के अध्यक्ष भी रह चुके थे. उन्होंने 1950 से 1962 तक राष्ट्रपति पद संभाला और लगातार दो बार इस पद पर चुने गए.
स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ. यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों में से एक था. देश की जनता ने पहली बार आम चुनाव के जरिए अपनी सरकार चुनी. उस समय मतदान की व्यवस्था आज की तुलना में काफी अलग और चुनौतीपूर्ण थी.
आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था. यह बजट आजादी और विभाजन के बाद पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों के बीच पेश किया गया था. इसमें सरकार की अनुमानित आय और खर्च का विवरण दिया गया था.
भारत के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया था. यानी स्वतंत्रता मिलने से कुछ सप्ताह पहले ही तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में मंजूरी मिल गई थी. ध्वज में केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ बीच में अशोक चक्र है.
स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी किया गया था. इस पर भारतीय तिरंगे के साथ आजादी की तारीख और जय हिंद शब्द अंकित थे. इसकी कीमत साढ़े तीन आना थी. यह डाक टिकट स्वतंत्र भारत की नई पहचान और आजादी की याद से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया.
आजादी के बाद के ये पहले पड़ाव केवल तारीखें नहीं हैं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक विकास की नींव भी हैं. पहला प्रधानमंत्री, पहला राष्ट्रपति, पहला आम चुनाव, पहला बजट और राष्ट्रीय ध्वज जैसे फैसलों ने नए भारत की राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.