नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय दौरे पर उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान रवाना हो गए. इस दौरे में वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे. इस दौरे का मकसद मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और क्षेत्र से सभ्यतागत जुड़ाव को गहरा करना है.
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रस्थान से पहले कहा कि यह दौरा शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा. ये मूल्य भारत की वैश्विक भागीदारी के केंद्र में हैं.
इस दौरे के पहले पड़ाव पर पीएम मोदी उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचेगे. यह उनका उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा होगा. यहां वे राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे. दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे.
PM Modi emplanes for Tashkent, Uzbekistan, beginning an important visit focused on strengthening India-Uzbekistan ties, deepening strategic cooperation and advancing shared priorities.
— BJP (@BJP4India) August 29, 2026
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पीएम मोदी शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा करेंगे. उन्होंने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक और जन-जन स्तर के गहरे रिश्तों का प्रतीक बताया. व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा.
पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में 30 अगस्त तक रहेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री किर्गिस्तान की राजधानी बिष्केक जाएंगे, जहां एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. यह सम्मेलन एससीओ की 25वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक है. भारत 2017 से इसका पूर्ण सदस्य है. समिट के दौरान पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. वे छठे विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे क्षेत्र में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे. आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त क्षेत्र बनाने पर जोर रहेगा. यह दौरा मध्य एशिया के साथ भारत के रिश्तों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है.