Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड के चार दिन बाद चीन की रेस्क्यू टीम आखिरकार ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर तक पहुंच गई. लेकिन वहां उन्हें सिर्फ खंडहर और मलबा ही मिला. बता दें कि यह वही बॉर्डर क्रॉसिंग है जहां कई भारतीय तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए या वापस लौटते समय मौजूद थे. यहीं पर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन का 80 सदस्यीय समूह भी मौजूद था.
ज्यादातर सड़कें नष्ट हो चुकी हैं. 21 सदस्यीय चीनी रेस्क्यू टीम को एक सर्च डॉग के साथ पहाड़ों, घाटियों, जंगलों और चट्टानों को पार करके पहुंचना पड़ा. रस्सियों की मदद से वे आगे बढ़े. रेस्क्यू वर्कर जोउ मिंगकी ने कहा, “कोई सड़क नहीं थी. सिर्फ घना जंगल और खड़ी चट्टानें थीं. कॉम्प्लेक्स पर नजर दौड़ाओ तो सिर्फ खंडहर ही नजर आते थे.” इमिग्रेशन सेंटर और आसपास का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर मलबे और कीचड़ के नीचे दब चुका है.
25 अगस्त को तिब्बत से लगते नेपाल के जिलों में आई इस बाढ़ ने 2015 के भूकंप के बाद की सबसे बड़ी आपदा ला दी. घर, गाड़ियां और पुल बह गए. अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2000 लोग लापता हैं. बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं. भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में करीब 320 भारतीय अभी भी लापता हैं. चीन की तरफ करीब 400 भारतीयों से संपर्क स्थापित हो चुका है.
ग्यिरोंग पोर्ट तिब्बत और नेपाल को जोड़ता है. कैलाश मानसरोवर जाने वाले ज्यादातर यात्री यहीं से इमिग्रेशन क्लियर करते हैं. सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि अचानक पानी और कीचड़ की तेज धार मल्टीस्टोरी इमिग्रेशन ऑफिस पर कैसे टूटी और लोग बचने की कोशिश करते दिखे. रिपोर्ट्स के अनुसार, बाढ़ आने के समय इमिग्रेशन सेंटर या उसके आसपास कम से कम 130 लोग मौजूद थे. इनमें सबसे बड़ा समूह ईशा फाउंडेशन का था, जिसमें 19 देशों के 46 महिलाएं और 34 पुरुष शामिल थे.
सद्गुरु ने एक भावुक वीडियो में कहा कि उनका पूरा समूह इमिग्रेशन बिल्डिंग में पहुंच चुका था. “पूरा समूह वहीं था... यह बहुत भयानक घटना है.” वे खुद कुछ दिन पहले उसी बिल्डिंग से गुजरे थे. उन्होंने कहा कि वह इमारत पूरी तरह बह गई है.