सोशल मीडिया कंपनी Meta को अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में डेटा प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है. अदालत ने कंपनी को 25 अरब डॉलर यानी लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया है. यह मामला Facebook यूजर्स की निजी जानकारी और कंपनी के प्राइवेसी संबंधी दावों से जुड़ा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अमेरिका में किसी कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े वित्तीय दंडों में से एक है. Meta ने इस फैसले का विरोध किया है और इसके खिलाफ अपील करने की बात कही है.
न्यू मैक्सिको की अदालत ने पाया कि Facebook ने अपने यूजर्स को डेटा की सुरक्षा और प्लेटफॉर्म पर मौजूद हानिकारक कंटेंट से निपटने के तरीकों के बारे में गुमराह किया. राज्य सरकार का आरोप था कि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यूजर्स की निजी जानकारी तक किन लोगों और तीसरे पक्ष के ऐप डेवलपर्स की पहुंच हो सकती है. साथ ही, कंपनी पर नफरत फैलाने वाली सामग्री और गलत जानकारी से जुड़े मामलों में अपने तौर-तरीकों को लेकर भी भ्रामक दावे करने का आरोप लगा.
सितंबर 2026 में जूरी ने पाया कि Meta और उसके नेतृत्व की ओर से दिए गए 29 बयानों में से 26 भ्रामक थे. जूरी ने इन बयानों से जुड़े मामलों में न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के 4.3 करोड़ से ज्यादा उल्लंघनों के लिए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया.
राज्य के कानून के तहत प्रत्येक उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसी आधार पर शुरुआती गणना में जुर्माने की रकम 219 अरब डॉलर से अधिक बन रही थी. हालांकि, जिला अदालत के न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने अंतिम जुर्माना घटाकर 25 अरब डॉलर तय किया.
अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माने की पूरी रकम का भुगतान होने तक उस पर सालाना 15 प्रतिशत की दर से ब्याज भी लग सकता है. न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी कानून का पालन करना होगा और उनके आकार या प्रभाव के कारण उन्हें नियमों से छूट नहीं मिल सकती.
Meta के चीफ लीगल ऑफिसर सी.जे. महोनी ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कंपनी को भरोसा है कि वह अपील में जीत हासिल करेगी. उनके मुताबिक, इस तरह का फैसला न्यू मैक्सिको में कारोबार करना मुश्किल बना सकता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुकदमे का उद्देश्य इंटरनेट पर लोगों के बोलने के तरीके को नियंत्रित करने के लिए नए नियम लागू करना है. फिलहाल कंपनी ने फैसले को चुनौती देने की बात कही है.
इस मामले की जड़ें साल 2018 में सामने आए Cambridge Analytica विवाद से जुड़ी हैं. उस समय ब्रिटेन की राजनीतिक सलाहकार कंपनी Cambridge Analytica पर आरोप लगा था कि उसने Facebook के करीब 8.7 करोड़ यूजर्स का निजी डेटा उनकी अनुमति के बिना हासिल किया. इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक विज्ञापनों और मतदाताओं की पसंद को समझने के लिए किया गया था.
इस विवाद के बाद Facebook की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे. न्यू मैक्सिको के मुकदमे में भी कंपनी के प्राइवेसी संबंधी दावों और यूजर्स की जानकारी तक तीसरे पक्ष की पहुंच को लेकर सवाल उठाए गए. अदालत के फैसले ने एक बार फिर बड़ी टेक कंपनियों की डेटा सुरक्षा और जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है.