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'पटनायक' रहे हैं ओडिशा के नायक, 77 साल में 45 साल मुख्यमंत्री की गद्दी पर किया राज, क्या इस बार बदल जाएगा इतिहास?

Odisha Assembly Election 2024: ओडिशा में पटनायक सरनेम के मुख्यमंत्रियों ने सत्ता पर अधिक समय तक राज किया है. अब इस बार कौन मुख्यमंत्री बनेगा यह 4 जून को पता चलेगा.

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Gyanendra Tiwari
naveen patnaik

Odisha Assembly Election 2024: ओडिशा की राजनीति में पटनायक सरनेम का राज रहा है. राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से 'पटनायक' राज्य का प्रमुख चेहरा रहा है. आजाद के 77 साल में दो पटनायक परिवारों से 3 लोगों ने ओडिशा की गद्दी पर 45 सालों तक राज किया है. बचे हुए 32 साल में ओडिशा को 11 मुख्यमंत्री मिले. इस बार विधानसभा चुनाव में क्या एक बार फिर से ओडिशा को फिर से पटनायक सरनेम वाला मुख्यमंत्री मिलेगा या फिर इतिहास बदल जाएगा?

पटनायक सरनेम करण जाति से संबंध रखते हैं. इस जाति का एक दूसरा सर नेम मोहंती भी है. पूरे राज्य में इस जाति के करीब 2 फीसदी लोग हैं. ओडिशा की राजनीति में पटनायक को पॉलिटिकल जाति का दर्जा भी दिया जाता है.    

साल 2000 से ही मुख्यमंत्री हैं नवीन पटनायक

नवीन पटनायक का बतौर मुख्यमंत्री ये पांचवा कार्यकाल है. वो साल 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री हैं. छठी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए वो विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कोशिश कर रहे हैं. अगर वो मुख्यमंत्री बन गए तो इसी अगस्त में वह सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को पीछे छोड़ देंगे. वह किसी प्रदेश का सबसे ज्यादा समय तक के लिए मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे.

'पटनायक' सर नेम का राज

नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक साल 1961 से 1963 और 1990 से 1995 तक ओडिशा के मुख्यमंत्री थे. वहीं, जानकी बल्लभ पटनायक साल 1980 से 1989 और फिर 1995 से 1999 तक 14 वर्षों तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे.

पटनायक परिवार के सदस्य की राजनीति में एंट्री पर संशय

77 साल के बैचलर नवीन पटनायक ने पहले कहा था कि वो उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं आएगा. लेकिन ये बातें होती रहती हैं कि शायद उनके भतीजे अरुण पटनायक या उनकी भतीजी गायत्री जो उनके बड़े भाई प्रेम की संताने हैं वो नवीन पटनायक की सत्ता संभाल सकते हैं. 

हाल ही में नवीन के सहयोगी में वीके पांडियन बीजेडी के दूसरे मोस्ट पॉपुलर लीडर बनकर उभरे हैं. ऐसे में पटनायक परिवार के सदस्यों की राजनीति में एंट्री को लेकर की जा रही बातें कमजोर साबित हो रही है.

राज्य के अन्य मुख्यमंत्री

नवकृष्ण चौधरी (1950-1952 और 1952 से 1956) छह साल तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहें. वो भी करण जाति के थे.  नीलमणि राउतराय (ओबीसी, 1977-1980) और दो आदिवासी हेमा नंद बिस्वाल और गिरिधर गमांग को छोड़कर अन्य मुख्यमंत्रियों में बड़े पैमाने पर ब्राह्मण और राजपूत शामिल हैं.

मुख्यमंत्री के रूप में हेमा नंद (दिसंबर 1989-मार्च 1990, दिसंबर 1999-मार्च 2000) और गिरिधर (फरवरी 1999 से दिसंबर 1999) का कुल कार्यकाल 14 महीने था.

ओबीसी का दबदबा

करण और ब्राह्मण जाति के काल फीसदी राज्य का 10% से कम हैं. इसके बावजूद करण जाति का ओडिशा में दबदबा है. ओडिशा में लगभग 22.8% आदिवासी और 17% अनुसूचित जाति और अनुमानित 50% से अधिक ओबीसी हैं.

ओडिशा में 13 मई से लेकर 1 जून तक के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं. 4 जून को विधानसभा चुनाव का परिणाम आएगा. इस बार का चुनाव परिणाम क्या होगा ये तो 4 जून को ही पता चलेगा.