NEET Paper Leak: 5 मई को देश भर में आयोजित कराए गए NEET-UGC-2024 पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां कांग्रेस के आह्वाहन पर देश भर में पेपर लीक को लेकर हल्ला बोल प्रदर्शन चल रहा है तो वहीं पर दूसरी ओर बिहार पुलिस ने जिन आरोपियों को पकड़ा था उन्होंने अपने बयान दर्ज कर मामले को नया मोड़ दिया है.
बिहार पुलिस ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, हालांकि इस पूरे मामले के सूत्रधार में 5 लोगों का नाम आ रहा है जिसमें सिकंदर कुमार यादवेंदु, अनुराग यादव, प्रीतम कुमार, अमित आनंद और प्रदीप कुमार शामिल हैं. जहां सिकंदर कुमार यादवेंदु और अमित आनंद को इस पूरी घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है तो वहीं अनुराग यादव को परीक्षा की एक रात पहले पेपर लीक के बाकी अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिका बेचने में मदद करने वाला बताया जा रहा है.
अब गुरुवार को इस मामले में अहम मोड़ तब आया जब नीट पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड अमित आनंद ने परीक्षा से एक रात पहले पेपर लीक होने की बात को कबूल लिया है. अपने इस कबूलनामे में अमित आनंद ने बताया कि कैसे उसने एग्जाम से एक रात पहले अभ्यर्थियों से लाखों रुपए लेकर उन्हें लीक्ड पेपर के आंसर रटवाए थे. अमित आनंद ने पुलिस के सामने स्वीकारा है कि उसने छात्रों से पेपर लीक करने के बदले में 30-32 लाख रुपए की मांग की थी. पटना ईओयू (इकनॉमिक ऑफेंसेस यूनिट) ने अपनी जांच में 6 पोस्ट डेटेड चेक बरामद किए थे जो कि पेपर लीक कराने वाले माफियाओं के नाम ही है.
अब ईओयू इन अकाउंट होल्डर्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में लगा हुआ है. वहीं ईओयू को अमित आनंद के फ्लैट से नीट एग्जाम के सवाल और जवाब की जली हुई शीट के अवशेष भी मिले हैं और उसने अब यह कबूल लिया है कि वो पहले भी पेपर लीक कराने वाली घटनाओं में शामिल रहा है. बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले अमित आनंद की बात करें तो राजधानी पटना की एजी कॉलोनी में किराए पर एक फ्लैट लेकर रह रहा था, अपने कबूलनामें में उसने बताया कि वो कैसे इस पूरे मामले में संपर्क में आया.
अमित ने पुलिस को दिए बयान में कहा,' मेरा ये बयान बिना किसी दबाव या डर के है. मेरी दोस्ती दानापुर नगर निगम कार्यालय में जूनियर इंजीनियर सिकंदर से हुई थी और मेरे साथ नीतीश कुमार भी था. बातचीत के दौरान मैने सिकंदर को पेपर लीक करा स्टूडेंट्स को पास कराने की बात कही तो उसने मुझसे नीट का पेपर लीक कराने की बात कही और ये भी कहा कि उसके पास 4-5 अभ्यर्थी हैं जो पास होने के लिए अच्छी खासी रकम देने को तैयार हैं. मैंने सिकंदर को बताया कि पेपर लीक पर करीब 30-32 लाख रुपए खर्च आएगा तो उसने कहा कि वो 4 अभ्यर्थी ले आएगा. पेपर की तारीख तय होने के बाद जब सिकंदर ने लड़कों को लाने की तारीख पूछी तो मैंने उसे 4 मई की रात को लेकर आने को कहा, जहां मैने नीट के परीक्षा पेपर लीक करवाकर उनके जवाब रात भर रटवाए.'
अमित आनंद ने अपने पकड़े जाने के मुद्दे पर भी बात की और कहा कि अगर सिकंदर न पकड़ा गया होता तो उसका राज कभी भी नहीं खुलता. हालांकि जब सिकंदर पकड़ा गया तो उसने हम सब के बारे में बता दिया और उसी की निशानदेही पर हम पकड़े गए. अमित ने पहले भी पेपर लीक करवाने की बात कबूली है. सिकंदर की बात करें तो पहले उसे ही इस पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड समझा जा रहा था.
सिकंदर बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला है और पहले भी 3 करोड़ के एलईडी घोटले में जेल जा चुका है. रांची में ठेकेदारी से करियर का आगाज करने वाले सिकंदर ने 2012 में बिहार SSC की परीक्षा पास करने के बाद जूनियर इंजीनियर बन गया. सिकंदर की बात करें तो उसके दोनों बच्चे एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं और दामाद एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद पीजी कर रहा है. सिकंदर की गिरफ्तारी से पहले ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.
अनुराग यादव की बात करें तो वो सिकंदर का भतीजा है जिसे नीट परीक्षा पास कराने के लिए सिकंदर ने अमित से मिलवाया था और जो पेपर के जवाब उसे रटवाए थे एग्जाम में बिल्कुल वही आए थे. अनुराग यादव ने यह भी बताया कि उसके चाचा सिकंदर यादुवेंदु ने उसे बताया था कि अमित आनंद और नीतीश कुमार किसी भी पेपर को लीक कराने का दम रखते हैं लेकिन ऐसा करवाने के लिए 30 से 32 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं. अनुराग यादव ने अपने दोस्तों को साथ लाने की बात कही लेकिन उसने लालच में आकर उनसे 30-32 के बजाय 40 लाख रुपए वसूले. हालांकि जब वेहिकल चेकिंग के दौरान पकड़ा गया तो उसने सारी बात कबूल ली.
इससे पहले बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने दावा किया था कि प्रीतम कुमार, जो तेजस्वी यादव के मंत्री रहने के दौरान उनके निजी सचिव थे, ने बिहार सड़क निर्माण विभाग के एक कर्मचारी से संपर्क कर सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरा बुक कराया था. 1 मई को तेजस्वी यादव के निजी सचिव प्रीतम कुमार ने प्रदीप कुमार को फोन कर सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरा बुक करने को कहा था और 4 मई को प्रीतम कुमार ने दोबारा फोन कर ऐसा करने का आदेश दिया था. 'मंत्री जी' शब्द का इस्तेमाल प्रीतम कुमार ने किया था जो पिछली सरकार में तेजस्वी यादव के मंत्री रहते हुए उनके निजी सचिव थे. BJP नेता ने तेजस्वी यादव से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या प्रीतम कुमार अब भी उनके निजी सचिव हैं.
उन्होंने कहा,'तेजस्वी यादव को यह साफ करना चाहिए कि क्या प्रीतम कुमार अब भी उनके निजी सचिव हैं और उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि सिकंदर कुमार यादवेंदु कौन हैं. जब लालू प्रसाद यादव रांची में जेल में बंद थे, तब सिकंदर कुमार यादवेंदु लालू की सेवा में थे... वे सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे. वे लोगों के भविष्य के साथ खेलते हैं. जब वे सत्ता में होते हैं तो घोटाले करते हैं और नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. वे लोगों के भविष्य के साथ खेलते हैं.'
इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एक 'मंत्री जी' ने कथित तौर पर एक NEET उम्मीदवार (इंजीनियर का रिश्तेदार), उसकी मां और अन्य सहयोगियों के लिए पटना में एक सरकारी बंगले में ठहरने की व्यवस्था की. अपने कबूलनामे में, यादवेंदु ने कथित तौर पर चार NEET उम्मीदवारों और उनमें से एक के अभिभावक को पटना में ठहरने की सुविधा देने की बात स्वीकार की. गेस्ट हाउस की रफ बिल बुक में एक 'मंत्री जी' का उल्लेख है, जिन्होंने कथित तौर पर यादव और उनके सहयोगियों के ठहरने की सुविधा दी.