नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी संगठन के बीच टकराव अभी खत्म होता नहीं दिख रहा है. सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया, जिससे राजनीतिक बहस और तेज हो गई.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने प्रदर्शन कर रहे संगठन को वार्ता आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. इससे साफ संकेत मिला कि दोनों पक्षों के बीच फिलहाल सहमति बनने की संभावना कम है. संगठन का कहना है कि केवल बातचीत या नई घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है. इसी कारण वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं.
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this…— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026Also Read
विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल लोगों को कड़ी और त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए. सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं.
प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार केवल पेपर लीक के बाद सजा की बात कर रही है, जबकि असली जरूरत उन कारणों को खत्म करने की है जिनकी वजह से बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं. उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियों के कारण यह समस्या बनी हुई है. उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक पेपर लीक की घटनाएं रुकना मुश्किल है. संगठन ने एक बार फिर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई.
Govt sources say offer for continuation of talks was sent to protesting Cockroach Janta Party, however, the offer was rejected by CJP's leadership. pic.twitter.com/MqPt5qE4en
— ANI (@ANI) July 23, 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में असफल रही है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता कमजोर हुई है. राहुल गांधी ने कहा कि केवल सख्त सजा का ऐलान काफी नहीं है, बल्कि उन कारणों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी वजह से बार-बार परीक्षा विवाद सामने आ रहे हैं. इस बीच सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है.