हैदराबाद: हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यानी NALSAR यूनिवर्सिटी के 450 से अधिक छात्रों ने 2026 के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्या कांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने की प्रस्तावित योजना पर आपत्ति जताई है. 2026 बैच के छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर कथित निमंत्रण पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
छात्रों का कहना है कि उनका विरोध मुख्य न्यायाधीश के पद को लेकर नहीं है, बल्कि हाल के कुछ न्यायिक घटनाक्रमों और जस्टिस सूर्या कांत से जुड़ी कथित टिप्पणियों को लेकर है. छात्रों ने कहा कि कानून के विद्यार्थी होने के नाते वे चाहते हैं कि दीक्षांत समारोह उन संवैधानिक मूल्यों, न्याय तक पहुंच और नागरिक अधिकारों का प्रतिनिधित्व करे, जिन्हें विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाता है.
More Cockroaches loading Students of outgoing 2026 batch at NALSAR University of Law, Hyderabad, do not want CJI Surya Kant as chief guest at their convocation ceremony
— Edward kumar Lakra (@LakraKumar91345) August 9, 2026
Students’ dissent is over CJI’s recent conduct & statements during #NEET protests in New Delhi pic.twitter.com/gqBfEocabj
छात्रों ने क्या बताई वजह?
छात्रों ने अपने पत्र में 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर मंतर से संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले का उल्लेख किया है. छात्रों के अनुसार, 23 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो देखने से इनकार किया था.
छात्रों के पत्र में दावा किया गया है कि सुनवाई के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के वीडियो को देखने के अनुरोध पर यह कहा गया कि अदालत वीडियो देखने में रुचि नहीं रखती और उसके पास समय नहीं है. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों को आगे रखने का समय भी सीमित कर दिया गया.
हालांकि, इन दावों और पत्र में वर्णित घटनाओं को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है. छात्रों ने अपने प्रतिनिधित्व में इन्हीं कथित घटनाक्रमों को अपनी आपत्ति का आधार बनाया है.
छात्रों ने जंतर मंतर प्रदर्शन से जुड़ी कथित टिप्पणियों का भी उल्लेख किया है. पत्र में मुख्य न्यायाधीश पर भारतीय युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने वाली कथित टिप्पणी का आरोप लगाया गया है.
छात्रों ने कहा कि ऐसी कथित टिप्पणियां और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में अदालत के रुख को लेकर सामने आई खबरें उनके लिए चिंता का विषय हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में मुख्य न्यायाधीश को दीक्षांत समारोह में डिग्री प्रदान करने के लिए आमंत्रित करना उन्हें उचित नहीं लगता.
प्रतिनिधित्व में छात्रों ने कहा कि उनकी आपत्ति किसी संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ नहीं है. उनका सवाल यह है कि हाल की न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी रिपोर्टें क्या उन मूल्यों के अनुरूप हैं, जिन्हें एक कानून विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह प्रदर्शित करना चाहिए.
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मुख्य अतिथि के चयन पर दोबारा विचार करने और अंतिम निर्णय से पहले graduating batch से चर्चा करने की अपील की है.