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India Daily

BRICS से पहले भारत का बड़ा दांव, अरुणाचल के नक्शे में बदलाव कर चीन को दिया सख्त संदेश

भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक सर्वे ऑफ इंडिया नक्शे को अपडेट करते हुए 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज किया है. इनमें थग ला, लॉन्गजू, चार पहाड़ी दर्रे, सांबो सरोवर और शेर ए थापा मेमोरियल जैसे स्थान शामिल हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
BRICS से पहले भारत का बड़ा दांव, अरुणाचल के नक्शे में बदलाव कर चीन को दिया सख्त संदेश
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: भारत ने अरुणाचल प्रदेश के आधिकारिक नक्शे को अपडेट करते हुए 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय मानचित्र पर मानकीकृत नामों के साथ दर्ज किया है. इनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रे, झील, बस्तियां और 1962 के भारत चीन युद्ध से जुड़े स्थान शामिल हैं. यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं.

नए अपडेट को चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है. चीन अरुणाचल प्रदेश को जंगनान या दक्षिण तिब्बत कहता रहा है, जबकि भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है. भारत का कहना है कि किसी स्थान का नाम बदलने से उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदलती.

नक्शे में क्या क्या जोड़ा गया?

नए आधिकारिक नक्शे में चार पहाड़ी दर्रों द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला को शामिल किया गया है. इसके अलावा सांबो सरोवर को भी भारतीय नाम के साथ चिह्नित किया गया है. कुल 27 स्थानों को मानकीकृत तरीके से दर्ज किया गया है.

इनमें लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर जैसे स्थान शामिल हैं.

क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

इसके अलावा शेर ए थापा मेमोरियल को भी नक्शे में शामिल किया गया है. यह 1962 के युद्ध में वीरता दिखाने वाले हवलदार शेर ए थापा की स्मृति से जुड़ा है. इस तरह नक्शे में दर्ज किए गए कई स्थान भारत चीन सीमा विवाद और ऐतिहासिक सैन्य संघर्षों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं.

थग ला और लॉन्गजू क्यों महत्वपूर्ण हैं?

थग ला 1962 के भारत चीन युद्ध के शुरुआती संघर्षों से जुड़ा इलाका है. वहीं लॉन्गजू 1959 में भारत और चीन के शुरुआती सीमा टकरावों में शामिल रहा था. ऐसे स्थानों को आधिकारिक राजनीतिक नक्शे में स्पष्ट रूप से दर्ज करना भारत की क्षेत्रीय स्थिति को दोहराने के साथ ऐतिहासिक संदर्भ को भी सामने लाता है.

भारत के इस कदम को सीमा पर प्रशासनिक और कार्टोग्राफिक स्पष्टता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. यह कोई नई सीमा रेखा खींचने का कदम नहीं है, बल्कि भारत अपने आधिकारिक नक्शे में उन क्षेत्रों और स्थानों की पहचान को स्पष्ट कर रहा है जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है.