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जेल से बाहर आकर भी डिप्टी सीएम नहीं बन पाएंगे मनीष सिसोदिया, समझिए कहां फंसा है पेच

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से आज जमानत मिल गई. जेल से रिहाई के बाद भी दिल्ली के डिप्टी सीएम के पद पर उनकी ताजपोशी फिलहाल नहीं हो पाएगी. डिप्टी CM के पद से इस्तीफे के बाद कैबिनेट में उनकी जगह आतिशी ने ली. आतिशी ने शिक्षा, वित्त और पीडब्ल्यूडी के साथ-साथ कई अन्य विभागों का कार्यभार संभाला है.

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जेल से बाहर आकर भी डिप्टी सीएम नहीं बन पाएंगे मनीष सिसोदिया, समझिए कहां फंसा है पेच
Courtesy: social media

दिल्ली आबकारी नीति मामले में 2022 में CBI की ओर से दर्ज पहली FIR में आरोपी के रूप में शामिल मनीष सिसोदिया को आज सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. डेढ़ साल पहले सीबीआई ने और फिर दो सप्ताह बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मनीष सिसोदिया को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में गिरफ्तार किया था.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, डेढ़ साल तक जेल में रहने के बाद जब आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया तिहाड़ जेल से बाहर आएंगे तो वे फिलहाल विधायक ही रहेंगे. 26 फरवरी, 2023 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से गिरफ्तार किए जाने के कुछ दिनों बाद उपमुख्यमंत्री पद और दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद, सिसोदिया को दोबारा शपथ लेने तक कोई मंत्री पद नहीं मिल सकता है.

इसलिए डिप्टी सीएम नहीं बन सकते मनीष सिसोदिया

सीबीआई और ईडी की ओर से दर्ज किए गए दोनों केस में सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया को आज जमानत दे दी. चूंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसी मामले में सीबीआई केस में जेल में हैं, इसलिए कोई नया मंत्री या उपमुख्यमंत्री नियुक्त नहीं किया जा सकता. एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा कि मंत्रिपरिषद में शामिल होने और उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी नियुक्ति के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए अपने सचिवालय में प्रस्ताव भेजना होगा.

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि एक मंत्री पद (समाज कल्याण मंत्री समेत अन्य समान विभागों का पद) खाली है, लेकिन सिसोदिया को इनका प्रभार सौंपे जाने की शर्त वही है. इस आशय का प्रस्ताव मुख्यमंत्री की ओर से लाया जाना चाहिए, जो जेल में हैं. इस बीच, आप नेताओं ने कहा कि चूंकि सिसोदिया की पत्नी अस्वस्थ हैं, इसलिए उम्मीद है कि वह फिलहाल उनकी सेहत पर ध्यान देंगे.

फिलहाल सिसोदिया के लिए परिवार प्राथमिकता

आप के एक नेता ने कहा कि बेशक, वे पार्टी के मामलों में शामिल होंगे, लेकिन मंत्री पद के बिना वह आधिकारिक बैठकों का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. फिलहाल उनकी प्राथमिकता उनका परिवार होगा. उनकी पत्नी मल्टीपल स्क्लेरोसिस से पीड़ित हैं और पिछले कुछ महीनों से काफी बीमार हैं.

इससे पहले सिसोदिया को उनकी पत्नी की बीमारी के मद्देनजर सप्ताह में दो बार उनसे मिलने की छूट दी गई थी. एक अन्य नेता ने कहा कि सिसोदिया जल्द ही अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करेंगे. पिछले कुछ महीनों में उनकी अनुपस्थिति में उनके निर्वाचन क्षेत्र में काम के लिए फंड जारी किया गया था, लेकिन कई चीजें हैं जिनके लिए उनके हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, जिसमें अपेक्षित कार्यों का पालन करना भी शामिल है.

सिसोदिया के इस्तीफे के बाद कैबिनेट में उनके पास जो विभाग थे, वे आतिशी को दे दिए गए थे. जब मनीष सिसोदिया मंत्री थे और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन जेल में थे, तब सिसोदिया के पास 18 विभाग थे. वर्तमान में, आतिशी को 13 से अधिक विभाग सौंपे गए हैं.