मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा ने कई जिंदगियों को तोड़ा, लेकिन कुछ कहानियां समय के साथ और भी दर्दनाक बनती चली गईं. ऐसी ही एक कहानी है 20 वर्षीय युवती की, जिसने अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था. लगातार इलाज, राहत शिविरों और अस्पतालों के बीच उसका संघर्ष चलता रहा. गुवाहाटी के एक अस्पताल में इस महीने उसकी मौत ने एक बार फिर हिंसा, न्याय और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पीड़िता के अनुसार, 15 मई 2023 को उसे इम्फाल के न्यू चेकॉन इलाके में एक एटीएम बूथ से अगवा किया गया. उसने आरोप लगाया कि कई घंटों तक अलग-अलग स्थानों पर उसके साथ यौन हिंसा हुई और उसे जबरन वाहनों में घुमाया गया. महिला का दावा था कि हमलावरों में कुछ लोग अरम्बाई तेंगोल से जुड़े थे. एक ऑटो चालक की मदद से वह किसी तरह वहां से निकल पाई.
घटना के बाद युवती को पहले कांगपोकपी जिले के राहत शिविरों में रखा गया. बाद में मणिपुर और नागालैंड के अस्पतालों में उसका इलाज हुआ. लगातार जटिलताएं बढ़ने पर उसे गुवाहाटी शिफ्ट किया गया. परिवार का कहना है कि गंभीर शारीरिक चोटों के साथ-साथ गहरा मानसिक आघात भी कभी ठीक नहीं हो पाया. गर्भाशय से जुड़ी गंभीर समस्याओं ने उसकी हालत और बिगाड़ दी.
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने आरोप लगाया कि महिला को पहले मीरा पैबी के नाम से जानी जाने वाली महिलाओं के समूह ने पकड़ा और बाद में अरम्बाई तेंगोल के लोगों को सौंप दिया गया. संगठन का दावा है कि उसे मारने के निर्देश दिए गए थे. बयान के अनुसार, यौन हिंसा के बाद उसे बिष्णुपुर जिले में छोड़ दिया गया.
पीड़िता के एक पुराने वीडियो में उसने बताया था कि मामले में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी. पुलिस के अनुसार, शून्य एफआईआर दर्ज कर इसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया. आईपीसी की कई गंभीर धाराओं और एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज है, पर अब तक गिरफ्तारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
महिला की मौत पर कुकी-जो संगठनों ने न्यायिक प्रणाली की विफलता का आरोप लगाया है. कमेटी ऑन ट्राइबल इंटीग्रिटी के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे मामलों ने समुदाय के भीतर असुरक्षा और अलगाव की मांग को और मजबूत किया है. मई 2023 से जारी हिंसा में सैकड़ों जानें गईं और हजारों लोग विस्थापित हुए.