Mahadev Betting App: महादेव सट्टेबाजी ऐप के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने एक बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने बताया है कि दुबई में बैठे प्रमोटरों ने सट्टेबाजी सिंडिकेट की काली कमाई को भारतीय शेयर मार्केट में लगाया था. इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल का नाम भी शामिल हैं. साथ ही कई नौकरशाह भी जांच के दायरे में हैं.
जांच से पता चला है कि आरोपियों के पास 1,186 करोड़ रुपये से ज्यादा की सिक्योरिटी थीं, जिसमें भारतीय एजेंसी की ओर से अटैक किया गया 580 करोड़ रुपये का स्टॉक भी शामिल है. वहीं 606 करोड़ रुपये के स्टॉक एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) की ओर से इन्वेस्ट किए गए पाए थे.
ईडी ने कहा है कि कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर टिबरेवाल, जो अब दुबई में है, को कई लिस्टेड कंपनियों के साथ मिलकर भारतीय शेयर बाजारों में हेरफेर करने में शामिल पाया गया है. वह महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल का पार्टनर है. दोनों को दुबई पुलिस ने हिरासत में लिया था.
एजेंसी ने दावा किया है कि 29 फरवरी तक हरि शंकर टिबरेवाल के सहयोगियों के नियंत्रण वाली भारतीय कंपनियों के पास 580 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी थी. एफपीआई के जरिए भारतीय शेयरों में निवेश करने वाली विदेशी संस्थाओं के पास 606 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी पाई गई है.
अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट और स्टॉक में हेराफेरी में शामिल पाई गई लिस्टेड फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है. ईडी ने अधिकारियों के साथ अपनी जांच का शेयर साझा किया है, जिससे पता चला है कि कैसे टिबरेवाल ने अपनी ज्यादा से ज्यादा रकम का इस्तेमाल शेयर की कीमतों में अस्थायी उतार-चढ़ाव बनाने के लिए किया था.
ईडी के अनुसार टिबरेवाल ने एफपीआई के जरिए कुछ शेयरों में अपराध की आय डाली, जिससे उनमें अचानक काफी बढ़ोत्तरी हुई. एजेंसी ने कहा कि महादेव ऐप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक कुल कुर्की 1,700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है. 2 मार्च को एजेंसी ने महादेव ऑनलाइन बुक मामले में उनकी भूमिका के लिए रायपुर में टिबरेवाल के दो सहयोगियों, गिरीश तलरेजा और सूरज चोखानी को गिरफ्तार किया.