पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना जोखिम भरा हो गया था, लेकिन दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत पहुंच गए हैं. पहले शिवारिक मुंद्रा पोर्ट पर 46,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी लेकर पहुंचा, जो देश की एक दिन की आयात जरूरत के बराबर है. उसके बाद मंगलवार को नंदा देवी वडीनार पोर्ट पर 47,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी लेकर उतरा. ये दोनों जहाज संकट के बीच राहत की खबर हैं. कई शहरों में लंबी कतारें और छोटे व्यवसायों में डर का माहौल था, लेकिन अब आपूर्ति स्थिर होने की संभावना बढ़ गई है.
शिवारिक टैंकर ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सोमवार को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डाला. इसमें 46,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी थी. यह मात्रा करीब 32.4 लाख घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर के बराबर है. अधिकारियों का अनुमान है कि यह जहाज अकेले देश की एक दिन की कुल एलपीजी आयात जरूरत पूरी कर सकता है.
मंगलवार को नंदा देवी टैंकर वडीनार पोर्ट पहुंचा. इसमें 47,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी लदी थी. यह दूसरा जहाज है जो युद्ध प्रभावित हॉर्मुज से गुजरकर सुरक्षित भारत पहुंचा है. जहाज पहुंचने के बाद 24,000 मीट्रिक टन एलपीजी तमिलनाडु भेजी जाएगी. दोनों टैंकरों के आने से देशव्यापी संकट में कमी आने की उम्मीद जगी है.
शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने शनिवार को बताया था कि शिवारिक 16 मार्च और नंदा देवी 17 मार्च को पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. हॉर्मुज के पश्चिम में 24 भारतीय जहाज थे, जिनमें से ये दोनों एलपीजी कैरियर रात में सुरक्षित निकले और भारत की ओर बढ़े.
दोनों टैंकरों के आने से एलपीजी आपूर्ति में स्थिरता आएगी. कई शहरों में घरेलू और कमर्शियल गैस के लिए लंबी कतारें लगी थीं. होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट वेंडर बंद होने की आशंका जता रहे थे. अब इन जहाजों से मिली मात्रा से बाजार में दबाव कम होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी.
ये दोनों जहाज संकट के बीच बड़ी सफलता हैं. सरकार और तेल कंपनियां अन्य स्रोतों से भी आयात बढ़ाने की कोशिश में हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज में तनाव कम हुआ तो आपूर्ति सामान्य हो जाएगी. फिलहाल इन दो टैंकरों ने देश को तत्काल राहत दी है और आगे की चुनौतियों से निपटने का भरोसा बढ़ाया है.