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India Daily

क्या बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी असर

पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें जल्द ही बढ़ने की संभावना है. कीमतों में संभावित बढ़ोतरी पर फैसला अगले 5-7 दिनों के भीतर आ सकता है

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
क्या बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी असर
Courtesy: X

पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें जल्द ही बढ़ने की संभावना है. सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि कीमतों में संभावित बढ़ोतरी पर फैसला अगले 5-7 दिनों के भीतर आ सकता है. इसका कारण पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

वैश्विक बाजार में तनाव

इस बढ़त का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया भारी उछाल है. पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है. समुद्री जहाजों के आवागमन में बढ़ते जोखिम के कारण तेल की लागत में इजाफा हुआ है. इन अंतरराष्ट्रीय दबावों का सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर पड़ रहा है. उनका कच्चा माल महंगा हो गया है और उन्हें अपनी लागत निकालने में अब भारी मुश्किल हो रही है.

तेल कंपनियों पर बढ़ता दबाव

साल 2022 से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम आम जनता के लिए बिल्कुल नहीं बढ़ाए गए हैं. इस वजह से तेल कंपनियों को लागत से कम वसूली की मार झेलनी पड़ रही है. वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने पर भी घरेलू कीमतें न बढ़ने से कंपनियों को घाटा उठाना पड़ा है. अब यह घाटा काफी अधिक बढ़ गया है जहां सरकार के लिए इन कंपनियों को राहत देना जरूरी हो गया है ताकि काम सुचारू रूप से चलता रहे.

महंगाई की चुनौती

सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि ईंधन कीमतें बढ़ने से देश में महंगाई एकदम से न उछल जाए. डीजल महंगे होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ते हैं. विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने यह फैसला टाल दिया था, लेकिन अब आर्थिक संकेतकों को देखकर इस पर गंभीरता से विचार हो रहा है. अधिकारियों का मानना है कि वृद्धि ऐसी हो जिससे बाज़ार की मांग पर बुरा असर न पड़े.

सरकारी खजाने पर सीधा असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर गहरा प्रभाव डालता है. सरकार के लिए केवल टैक्स कटौती या सब्सिडी देकर जनता को राहत देना आसान नहीं है. इससे अन्य जरूरी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं. इसका असर हर घर के बजट पर पड़ता है.