मिडिल ईस्ट में तनाव का तीसरा हफ्ता जारी है. इस जंग में कई भारतीय छात्र ईरान में फंस गए हैं. हालांकि भारत सरकार हर बार की तरह इस बार भी अपने नागरिकों की स्थिति पर नजर बनाई हुई है. युद्ध की आग में जलते ईरान में फंसे भारतीय छात्रों का दूसरा खेप सोमवार की देर रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचा.
आर्मेनिया की राजधानी येरेवन से दुबई होते हुए दिल्ली पहुंचे इस विमान में दर्जनों भारतीय छात्र की घर वापसी हुई. बच्चों की घर वापसी उनके घर वालों के लिए काफी राहत की बात है. हालांकि अभी भी कई छात्र उस जंग की आग में फंसे हुए हैं. हालांकि घर वापस आए छात्र ने ईरान के हाल के बारे में बताया.
छात्रों ने बताया कि उनका यह सफर भी आसान नहीं रहा. विमान ने लगभग 12 घंटे की देरी से उड़ान भरी. हालांकि दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने सुरक्षा कारणों से उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी थीं. DCAA ने 16 मार्च को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि यात्रियों और स्टाफ की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है.
जिसके बाद उसी दिन शाम में फिर से इस विमान को हरी झंडी मिल गई. जिसके बाद विमान रविवार को भारत पहुंची. इस विमान में 80 लोग सवार थे. जिसमें छात्र और कई तीर्थयात्री भी शामिल थे. छात्रों ने बताया कि कैसे ईरान में उन्होंने कई दिनों तक मौत के डर में जिंदगी गुजारा. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने घर अपने देश वापस लौटने की बेहद खुशी है.
भारत पहुंचने वाले छात्रों ने बताया कि वह पहले ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों से बसों में सवार होकर ईरान-आर्मेनिया सीमा तक पहुंचे. जहां से वे सीमा पार करने के बाद वे येरेवन पहुंचे, वहां से दुबई की उड़ान ली और फिर दिल्ली के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ी. ईरान में हवाई यात्रा 28 फरवरी से बंद है, जिसके कारण जमीनी रास्ते से हवाई रास्ता तक पहुंचना पड़ रहा है. कश्मीर के रहने वाले लबीब कादरी ईरान के उर्मिया विश्वविद्यालय से MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से ईरान में लगातार बमबारी हो रही है. उन्होंने अपने सफर के बारे में बताते हुए कहा कि पहले जैसे तैसे ईरान से निकले लेकिन फिर दुबई में फंस गए. वहां भी ड्रोन हमले हो रहे थे, लेकिन अब भारत पहुंचकर यकीन हो रहा है कि हम सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि ईरान में पूरी तरह लॉकडाउन है. हर वक्त यही डर था कि कहीं हॉस्टल पर बम न गिर जाए. उन्होंने बताया कि लगभग 45 भारतीय छात्र हर दिन वहां बेसमेंट में रहने को मजबूर थे.