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दल-बदलुओं से दिल क्यों लगा रही है भाजपा? 2019 के बाद का पूरा सिजरा

Lok Sabha Elections 2024: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2019 के आम चुनाव में 75 दल-बदलू नेताओं को अपना प्रत्याशी बनाया था. इस बार भी बड़े पैमाने पर दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए नेताओं को टिकट दिया गया है.

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India Daily Live

Lok Sabha Elections 2024: देश की 543 लोकसभा सीटों में से भाजपा ने 400 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए भाजपा ग्राउंड लेबल पर काम भी कर रही है. 400 से अधिक सीटों पर जीत के लिए किए जा रहे प्रयासों में से एक ये कि पार्टी ने आम चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट में दलबदलुओं के लिए तो जगह बनाई ही है. साथ ही इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूर्व ब्यूरोक्रेट्स पर भी भरोसा जता रही है और उन्हें अपना उम्मीदवार बना रही है. 

भाजपा ने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण काम ये किया है कि उसने 20 से 30% मौजूदा सांसदों का टिकट काट दिया है. इनकी जगह पर अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुख चेहरों को पार्टी में शामिल कर उन्हें मौका दिया जा रहा है. भाजपा नेताओं के अनुसार, पार्टी के लिए दलबदलुओं को शामिल करना और यहां तक ​​कि उन्हें मैदान में उतारना भी असामान्य बात नहीं है.

ऐसा नहीं है कि भाजपा पहली बार दलबदलू नेता या फिर पूर्व ब्यूरोक्रेट्स पर भरोसा जता रही है. इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करीब 75 उम्मीदवार ऐसे चुनावी मैदान में उतारे थे, जिन्होंने आम चुनाव से ठीक पहले पाला बदला था और भाजपा में शामिल हुए थे. हालांकि, इनमें से कम से कम 47 उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. 

पार्टियां दल-बदलू नेताओं को क्यों करती हैं शामिल?

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये एक जुआ है. कभी-कभी दल-बदलू लोग पार्टी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरते. कभी-कभी  पहचाने जाने वाले चेहरे या लोकप्रिय नेता होने के बावजूद बड़े अंतर से चुनाव हार जाते हैं. पदाधिकारी ने बताया कि दल-बदलू नेताओं को पार्टियां इसलिए अपने में शामिल करती हैं, ताकि उनका वोट बैंक पुरानी पार्टी से नई पार्टी में शिफ्ट हो जाए. 

2019 में इन दिग्गजों ने बदली थी पार्टी, मिली थी हार

2019 में, कुछ बड़े राजनीतिक चेहरों ने पार्टियां बदली थीं, जिन्हें नई पार्टी ने टिकट भी दिया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इनमें शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नाम शामिल हैं, जो भाजपा से कांग्रेस में चले गए और पटना साहिब सीट भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद से हार गए. इनके अलावा, बैजयंत 'जय' पांडा, जिन्होंने चुनाव लड़ने के लिए बीजू जनता दल छोड़ दिया और ओडिशा के केंद्रपाड़ा से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. इसी तरह, राजस्थान के बाड़मेर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मानवेंद्र सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा.

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि हालांकि पार्टी के लिए अपने पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट देना प्राथमिकता होती है, लेकिन आखिर में टिकट इस बात पर तय होती है कि जीत किसकी होगी. 

543 में से भाजपा ने अब तक घोषित किए 417 उम्मीदवार

भाजपा ने 19 अप्रैल से शुरू होने वाले आम चुनाव के लिए अब तक 417 उम्मीदवारों की घोषणा की है. पार्टी ने इस बार भी कुछ ऐसे चेहरों को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने हाल के हफ्तों और महीनों में अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा है. इनमें से अधिकांश उन राज्यों से हैं, जहां भाजपा अपना वोट शेयर और सांसदों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जैसे कि तेलंगाना, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश.

शनिवार को घोषित किए 11 नाम, इनमें 4 दल-बदलू

भाजपा ने शनिवार यानी 30 मार्च को 11 नामों की सूची जारी की. इस लिस्ट में पार्टी ने 4 दलबदलू नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाया. गुरुवार को बीजू जनता दल छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले छह बार के सांसद भर्तृहरि महताब को कटक से मैदान में उतारा गया है. पंजाब में पार्टी ने लुधियाना से पूर्व कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, जालंधर से आम आदमी पार्टी के एकमात्र सांसद सुशील कुमार रिंकू और पटियाला से पूर्व कांग्रेस सांसद परनीत कौर को टिकट दिया है. ये तीनों हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए हैं.

दल-बदलू नेताओं को उम्मीदवार बनाने के मकसद के बारे में भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी, नेताओं के राजनीतिक दबदबे, किसी जाति या समुदाय पर उनकी पकड़ और लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता पर विचार करती है. हाल ही में शामिल किए गए इन नेताओं के नाम तय करने में यही हुआ है. 

उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से, भाजपा के गढ़ माने जाने वाले गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी दल-बदलू नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा गया है. गुजरात में पार्टी ने पूर्व कांग्रेस विधायक महेंद्र बरैया की पत्नी शोभना बरैया को साबरकांठा से और चंदू शिहोरा को सुरेंद्रनगर से मैदान में उतारा है.

80 सांसदों वाले उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने गठबंधन सुरक्षित कर रही है और विपक्ष के नेताओं को अपने साथ ला रही है. पार्टी ने 2021 में शामिल हुए पूर्व कांग्रेसी जितिन प्रसाद और कृपाशंकर सिंह को टिकट दिया है.

हरियाणा में, जहां भाजपा-जननायक जनता पार्टी का गठबंधन टूट गया है, वहां कई नए लोगों को उम्मीदवार बनाया गया है, जिनमें कुरूक्षेत्र से नवीन जिंदल, सिरसा से अशोक तंवर और हिसार से रणजीत सिंह शामिल हैं.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में, जहां भाजपा अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाई है, पार्टी अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए दलबदलुओं पर भरोसा कर रही है. पार्टी के उम्मीदवारों में तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति के पूर्व नेता शामिल हैं.

भाजपा ने पूर्व ब्यूरोक्रेट्स औऱ राजनयिकों पर भी जताया भरोसा

भाजपा ने पूर्व राजनयिकों और नौकरशाहों को भी चुनाव में उतारा है. 2019 में, पार्टी ने पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हरदीप पुरी और पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी आरके सिंह और सतपाल सिंह को मैदान में उतारा था. 

अमृतसर सीट पर भाजपा ने अमेरिका में पूर्व भारतीय राजदूत तरणजीत सिंह संधू को मैदान में उतारा है. इसके अलावा, बीरभूम से पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी देबाशीष धर, झाड़ग्राम से सरकारी डॉक्टर प्रणत टुडू और पश्चिम बंगाल के तमलुक से हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय को भी मैदान में उतारा है.

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