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India Daily

बॉयकॉट के बाद इंटरनेशनल बेइज्जती और बैन, पाकिस्तान की हेकड़ी निकालने की ICC ने की तैयारी; डर के मारे यू-टर्न लेगी शहबाज सरकार?

सरकारी ऐलान के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि सीनियर राष्ट्रीय टीम सरकार के फैसले का पालन करेगी.

Anuj
Edited By: Anuj
बॉयकॉट के बाद इंटरनेशनल बेइज्जती और बैन, पाकिस्तान की हेकड़ी निकालने की ICC ने की तैयारी; डर के मारे यू-टर्न लेगी शहबाज सरकार?

नई दिल्ली: पाकिस्तान ने टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया है. पाकिस्तान का यह फैसला अब उसके लिए बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है. यह मामला सिर्फ दो टीमों के बीच मैच का नहीं रहा, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है.

मीडिया से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आईसीसी इस मुद्दे पर जल्द ही एक अहम बैठक बुलाने की तैयारी में है. संभावना है कि यह बैठक मंगलवार या बुधवार को होगी, जिसमें पाकिस्तान के फैसले और उससे जुड़े नियमों पर विचार किया जाएगा और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

पाकिस्तान सरकार का ऐलान

दरअसल, रविवार को पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया के जरिए यह ऐलान किया कि उसकी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगी. सरकार के इस फैसले के बाद क्रिकेट जगत में हलचल मच गई. हालांकि, आईसीसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अब तक इस संबंध में आईसीसी को कोई आधिकारिक पत्र या लिखित सूचना नहीं दी है. यानी सरकार का फैसला सार्वजनिक हो चुका है, लेकिन बोर्ड स्तर पर औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.

पाकिस्तानी कप्तान ने क्या कहा?

सरकारी ऐलान के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि सीनियर राष्ट्रीय टीम सरकार के फैसले का पालन करेगी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला क्रिकेट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और टीम सरकार के निर्देशों के अनुसार ही चलेगी. इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि अगर सरकार अपने फैसले पर कायम रहती है, तो पाकिस्तान टीम भारत के खिलाफ मैदान में उतरने वाली नहीं है.

मोहसिन नकवी ने चुप्पी साधी

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की चुप्पी को लेकर हो रही है. अब तक उन्होंने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. गौर करने वाली बात यह है कि कुछ समय पहले नक़वी ने पूरे टूर्नामेंट के बहिष्कार की बात कही थी, लेकिन बाद में यह फैसला केवल भारत के खिलाफ मैच न खेलने तक सीमित रह गया. बताया जा रहा है कि यह कदम बांग्लादेश के समर्थन में उठाया गया है. बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत दौरे से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया.

पाकिस्तान को वॉकओवर देना होगा

आईसीसी सूत्रों के अनुसार, अगर पाकिस्तान 15 फरवरी को भारत के खिलाफ खेलने के लिए मैदान पर नहीं उतरता है, तो उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. सबसे पहले तो मैदान पर पाकिस्तान को इस मैच के लिए वॉकओवर देना होगा. इसका मतलब यह होगा कि भारत को बिना खेले ही जीत मिल जाएगी और पाकिस्तान को दो महत्वपूर्ण अंक गंवाने पड़ेंगे. और साथ ही पाकिस्तान का नेट रन रेट भी बुरी तरह प्रभावित होगा, जिसका असर टूर्नामेंट में आगे उसकी स्थिति पर पड़ सकता है.

पाकिस्तान को भारी नुकसान

मैदान के बाहर भी पाकिस्तान को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. आईसीसी पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) में विदेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर रोक लगाने पर विचार कर सकता है. इतना ही नहीं पीएसएल से अंतरराष्ट्रीय मान्यता और व्यावसायिक समर्थन भी वापस लिया जा सकता है. इसके अलावा आईसीसी के राजस्व पूल से पाकिस्तान को मिलने वाली राशि में बड़ी कटौती की जा सकती है, जबकि पीसीबी काफी हद तक इसी पैसे पर निर्भर रहता है.

भारी आर्थिक नुकसान होगा

इतना ही नहीं भारत-पाकिस्तान मैच न होने से जो भारी आर्थिक नुकसान होगा, उसकी भरपाई के लिए ब्रॉडकास्टर्स को मुआवजा देने का निर्देश भी पाकिस्तान को दिया जा सकता है. एशिया कप से पाकिस्तान को बाहर किया जाना और पाकिस्तान से जुड़ी सभी द्विपक्षीय सीरीज पर रोक लगना भी संभावित कदमों में शामिल हैं. ये सभी प्रतिबंध पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं.  एक आधिकारिक बयान में आईसीसी ने पाकिस्तान को संभावित नतीजों के बारे में चेतावनी दी है और पीसीबी से अपील की है कि वह अंतिम फैसला लेने से पहले इसके दूरगामी असर पर गंभीरता से विचार करें. 

ब्रॉडकास्टर्स को अरबों रुपये की कमाई

ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी यह मामला बेहद अहम है. भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले क्रिकेट मैचों में से एक माना जाता है. पिछले साल एशिया कप में दोनों टीमों के बीच एक महीने के अंदर तीन मुकाबले हुए थे, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को अरबों रुपये की कमाई हुई थी. अगर इस बार यह मैच नहीं होता है, तो ब्रॉडकास्टर्स आईसीसी पर दबाव बना सकते हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है.

क्रिकेट इतिहास में मैच बहिष्कार के उदाहरण

हालांकि, क्रिकेट इतिहास में पहले भी मैच बहिष्कार के उदाहरण मिलते हैं. 1996 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने सुरक्षा कारणों से श्रीलंका जाने से इनकार किया था. 2003 विश्व कप में इंग्लैंड ने राजनीतिक कारणों से जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच नहीं खेला था और न्यूज़ीलैंड ने केन्या के खिलाफ नैरोबी में होने वाला मुकाबला छोड़ा था. लेकिन इन सभी मामलों में और मौजूदा स्थिति में बड़ा अंतर यह है कि पहले कभी इतना बड़ा और हाई-प्रोफाइल मुकाबला आखिरी समय पर इस तरह रद्द करने का ऐलान नहीं हुआ था. इसी वजह से पाकिस्तान का यह फैसला अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़ी बहस का कारण बन गया है.