तमिलनाडु में प्रसिद्ध पलानी मुरुगन मंदिर की बहुमूल्य जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. राज्य की सीबी-सीआईडी ने मंदिर की करीब 100 करोड़ कीमत वाली जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मात्र 2 करोड़ में अपने नाम दर्ज कराने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं.
जांच के अनुसार, विवादित संपत्ति अरुलमिगु धंडायुथपानी स्वामी (पलानी मुरुगन) मंदिर की पार्किंग के लिए उपयोग होने वाली जमीन है. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस जमीन का पंजीकरण अवैध तरीके से करा लिया गया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वेल्लैथुरई, अनवरदीन और मुरुगदास के रूप में हुई है. इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है.
मामले का खुलासा होने के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित जमीन का पंजीकरण रद्द कर दिया. जिस समय रजिस्ट्री हुई थी, उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन को निलंबित कर दिया गया है. सीबी-सीआईडी ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ भी की. जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित फर्जी दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया से कैसे गुजर गए.
इसी बीच मदुरै के प्रसिद्ध मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर की संपत्ति से जुड़े एक अन्य मामले में सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि मंदिर की मूल्यवान जमीन की लीज अवैध तरीके से हस्तांतरित करने के लिए साजिश रची गई. जांच में कथित तौर पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी और मॉर्गेज दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है.
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, मदुरै की संबंधित जमीन वर्ष 1930 में मंदिर को धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए दान की गई थी. आरोप है कि कुछ निजी लोगों ने राजस्व और पंजीकरण विभाग के पूर्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर किया. तमिलनाडु में मंदिरों की संपत्तियां हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के अधीन आती हैं, इसलिए ऐसे मामलों को गंभीर आर्थिक और कानूनी अपराध माना जाता है.