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सारागढ़ी के 21 शहीदों को अमृतसर में नमन, 129वीं बरसी पर गूंजा वीरता और बलिदान का संदेश

अमृतसर के गोल्डन गेट स्थित सारागढ़ी स्मारक पर युद्ध की 129वीं वर्षगांठ मनाई गई. कार्यक्रम में 21 शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरता तथा इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
सारागढ़ी के 21 शहीदों को अमृतसर में नमन, 129वीं बरसी पर गूंजा वीरता और बलिदान का संदेश
Courtesy: social media

अमृतसर में सारागढ़ी युद्ध के 21 वीर सैनिकों की शहादत को याद करते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. गोल्डन गेट स्थित स्मारक पर हुए समारोह में एनसीसी कैडेट्स, विद्यार्थियों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया. गुरबाणी कीर्तन और देशभक्ति गीतों के जरिए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई.

गोल्डन गेट पर 21 शहीदों को नमन

सारागढ़ी फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 21 शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई. फाउंडेशन के प्रमुख गुरिंदर पाल सिंह जोसन विशेष रूप से अमेरिका से अमृतसर पहुंचे थे. कार्यक्रम में अमृतसर के मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए. सेंट सोल्जर एलीट कॉन्वेंट स्कूल, जंडियाला गुरु के एनसीसी कैडेट्स ने भी शहीदों को सलामी दी.

कीर्तन और देशभक्ति गीत से दी श्रद्धांजलि

समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने गुरबाणी कीर्तन और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ. जोसन ने बताया कि उन्होंने सारागढ़ी के 21 सैनिकों के जीवन और उनके परिवारों पर शोध किया है. उन्होंने सैनिकों के परिवारों को खोजने के साथ ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर उनके चित्र भी तैयार करवाए, ताकि उनकी कहानी को दुनिया तक पहुंचाया जा सके.

इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग

गुरिंदर पाल सिंह जोसन ने सारागढ़ी के इतिहास को संरक्षित करने के प्रयासों को लेकर चिंता भी जताई. उन्होंने बताया कि करीब चार साल पहले उन्होंने कक्षा 4 और 8 के पाठ्यक्रम में सारागढ़ी से जुड़ी शोध सामग्री शामिल करने के लिए चीफ खालसा दीवान को एक मसौदा दिया था. उनके मुताबिक, इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक शोध प्रकाशित नहीं हुआ.

स्मारक के रखरखाव पर भी जोर

मेयर जतिंदर सिंह मोती भाटिया ने कहा कि सारागढ़ी के 21 सैनिकों ने सीमित हथियार और गोला-बारूद के बावजूद बड़ी संख्या में मौजूद कबायली लड़ाकों का सामना किया और अपनी जान कुर्बान कर दी. उन्होंने जोसन के शोध और दस्तावेजीकरण के प्रयासों की सराहना की. साथ ही गोल्डन गेट स्थित स्मारक के बेहतर रखरखाव पर विशेष ध्यान देने का भरोसा दिया. स्कूल के निदेशक मंगल सिंह किशनपुरी ने भी कहा कि उनका संस्थान विद्यार्थियों को पंजाब के इतिहास से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रहा है.