नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में चल रहे 'विश्व एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने एक विवादित प्रदर्शन को अंजाम दिया. वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी क्षमता के प्रदर्शन के बीच करीब 10 कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी हॉल नंबर-5 में घुसकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ न केवल नारेबाजी की, बल्कि शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया. इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने साथ सफेद टी-शर्ट लेकर आए थे, जिन पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों के साथ 'इंडिया-यूएस ट्रेड डील', 'एपस्टीन फाइल्स' और 'पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड' जैसे विवादास्पद नारे लिखे हुए थे. इस प्रदर्शन के दौरान हॉल में मौजूद अन्य प्रतिभागियों और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प भी हुई. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.
भाजपा ने इस घटना को भारत की प्रतिष्ठा पर अंतरराष्ट्रीय प्रहार बताया है. भाजपा सांसद संबित पात्रा ने तीखे लहजे में कहा- 'राहुल गांधी और कांग्रेस देश के सबसे बड़े गद्दार हैं. जब देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, ये लोग बाधा डालने पहुंच जाते हैं. कांग्रेस की इस राजनीति के लिए केवल तीन शब्द पर्याप्त हैं, टॉपलेस, ब्रेनलेस और शेमलेस.'
वहीं, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे वैश्विक मंच पर भारत को नीचा दिखाने की सोची-समझी साजिश करार दिया. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के मुख्य आयोजक नरसिम्हा यादव के राहुल गांधी के साथ करीबी संबंध हैं. प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे 'एंटी-नेशनल एक्ट' बताते हुए आरोप लगाया कि इसके निर्देश सीधे गांधी-वाड्रा परिवार से मिले थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई दिग्गजों ने भी इस कृत्य की घोर निंदा की है.
विवाद बढ़ता देख कांग्रेस और युवा कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं का बचाव किया है. आईवाईसी का तर्क है कि 'विश्व एआई समिट' भारतीय डेटा को विदेशी हाथों में बेचने का एक प्रचार मंच बन गया है. कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि कॉरपोरेट हितों को राष्ट्रहित से ऊपर रखा जा रहा है, इसलिए एक 'समझौतावादी' प्रधानमंत्री के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य था. विपक्षी दल का आरोप है कि समिट के माध्यम से देश की पहचान के साथ समझौता किया जा रहा है.