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India Daily

'आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण', सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में SIR के लिए हाई कोर्ट को दिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया है. राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद और अविश्वास को देखते हुए कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण', सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में SIR के लिए हाई कोर्ट को दिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के आदेश
Courtesy: pinterest

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच चल रहा टकराव अब शीर्ष अदालत की दहलीज पर है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है. कोर्ट के अनुसार, दो प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं के बीच विश्वास की कमी के कारण आम नागरिकों के दावों और आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है. इस गतिरोध को दूर करने के लिए अदालत ने विशेष निर्देश जारी किए हैं.

SIR के लिए न्यायिक अधिकारियों की सेवा ली जाए

 सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन के लिए न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं उपलब्ध कराए. कोर्ट का मानना है कि दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे चुनावी पारदर्शिता प्रभावित हो रही है. इन अधिकारियों की नियुक्ति से विसंगति सूची में शामिल लोगों की शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा हो सकेगा. यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने और जनता का विश्वास बहाल करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.

संवैधानिक संस्थाओं के बीच अविश्वास

 मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी खींचतान को एक 'दुर्भाग्यपूर्ण परिदृश्य' करार दिया है. उनके अनुसार, इन दो महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं के बीच भारी 'विश्वास की कमी' देखी जा रही है. एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों और प्रत्यारोपों के कारण प्रशासनिक कार्य बाधित हो रहे हैं. कोर्ट ने चेतावनी दी कि संस्थागत लड़ाई का असर मतदाता सूची के शुद्धिकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर निष्पक्ष चुनाव से जुड़ा है.

वर्तमान हालात सामान्य नहीं

 शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात सामान्य नहीं हैं, इसलिए उसे यह 'असाधारण आदेश' पारित करना पड़ा है. कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा कि वह जिला जज रैंक के सेवारत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को इस कार्य के लिए मुक्त करे. आमतौर पर न्यायिक अधिकारियों को मतदाता सूची के काम में इस तरह तैनात नहीं किया जाता, लेकिन बंगाल में उपजी 'असाधारण परिस्थितियों' ने न्यायपालिका को इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के लिए विवश कर दिया है.

दावों और आपत्तियों का निष्पक्ष समाधान

 अदालत ने कहा कि ये न्यायिक अधिकारी विशेष रूप से उन दावों और आपत्तियों की जांच करेंगे, जो फिलहाल विसंगति सूची के कारण लंबित हैं. न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि शिकायतों का निस्तारण किसी राजनीतिक दबाव के बिना कानून के दायरे में हो. इससे उन नागरिकों को राहत मिलेगी जिनके नाम तकनीकी कारणों या विवादों की वजह से अटके हुए हैं. कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिहीन, पारदर्शी और विश्वसनीय हो सके.