लंबे समय के कूटनीतिक तनाव के बाद दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देश भारत और बांग्लादेश एक नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. ढाका में सत्ता परिवर्तन और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं फिर से खोल दी हैं. यह फैसला न केवल दोनों देशों के बीच मानवीय संपर्कों को मजबूती देगा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नई सरकार भारत के साथ सार्थक संवाद के लिए तैयार है.
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के संबंधों में काफी गिरावट आई थी. विशेष रूप से छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मृत्यु और उसके बाद भड़की अस्थिरता ने कूटनीतिक दूरियां बढ़ा दी थीं. उस दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं और लिंचिंग ने भारत में गहरी चिंता पैदा की थी लेकिन अब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार इन पुरानी कड़वाहटों को पीछे छोड़कर विश्वास बहाली की दिशा में सक्रिय और गंभीर दिखाई दे रही है.
दिल्ली में बांग्लादेशी उच्चायोग ने शुक्रवार से सभी श्रेणियों के वीजा जारी करना शुरू कर दिया है. इससे पहले तनाव के कारण केवल व्यावसायिक और कार्य वीजा ही दिए जा रहे थे. अब पर्यटन और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए यात्रा करने वाले भारतीयों को भी आसानी से वीजा मिल सकेगा. यह कदम व्यापार और पर्यटन क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित होगा. भारत की ओर से भी जल्द ही बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पूर्ण वीजा सेवाएं बहाल करने की उम्मीद जताई गई है.
भारत ने भी बांग्लादेश के साथ सहयोग बढ़ाने के सकारात्मक संकेत दिए हैं. सिलहट में तैनात भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बांग्लादेशी नागरिकों के लिए चिकित्सा और डबल-एंट्री वीजा की प्रक्रिया पहले ही तेज कर दी गई है. जल्द ही सामान्य यात्रा वीजा भी मिलने लगेंगे. यह बदलाव भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के अनुरूप है. दोनों देशों के अधिकारी अब रुकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और कनेक्टिविटी योजनाओं को फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं.
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए किसे चुनेंगे. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हाल ही में रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया है. यदि रहमान दिल्ली आते हैं, तो यह एक पुरानी परंपरा की वापसी होगी. इससे पहले पूर्व अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इस परंपरा से हटते हुए चीन का दौरा किया था.