नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से मंगलवार, 20 फरवरी को कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए भौतिक विज्ञान (Physics) की परीक्षा आयोजित की गई. 70 अंकों की इस मुख्य परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को तीन घंटे का समय दिया गया था. परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले छात्रों और विषय विशेषज्ञों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं के अनुसार, इस वर्ष का प्रश्नपत्र 'आसान से मध्यम' (Easy to Moderate) स्तर का रहा.
शिक्षकों का मानना है कि पूरा पेपर निर्धारित सिलेबस के दायरे में ही था और जिन छात्रों ने साल भर नियमित पढ़ाई की है, उनके लिए यह परीक्षा काफी स्कोरिंग साबित होने वाली है.
वर्ष 2026 की इस फिजिक्स परीक्षा का प्रश्नपत्र कुल 33 अनिवार्य प्रश्नों के साथ पांच अलग-अलग सेक्शन (A, B, C, D और E) में विभाजित था.
• सेक्शन A: इसमें एक-एक अंक के बहुविकल्पीय (MCQ) और अभिकथन-तर्क (Assertion-Reason) प्रश्न शामिल थे, जो पूरी तरह से कॉन्सेप्ट पर आधारित और संतुलित थे.
• सेक्शन B: दो-दो अंकों वाले इस खंड में न्यूक्लियाई, ड्यूल नेचर और वेव ऑप्टिक्स से जुड़े प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें से कुछ में आंतरिक विकल्प भी मौजूद थे.
• सेक्शन C और D: सेक्शन C में तीन अंकों के लिए थ्योरी और न्यूमेरिकल का सटीक मिश्रण देखा गया, जिसमें गॉस लॉ, व्हीटस्टोन ब्रिज और p–n जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक शामिल थे. वहीं, सेक्शन D में गैल्वानोमीटर और फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट पर आधारित 'केस स्टडी' प्रश्न पूछे गए थे.
बेंगलुरु स्थित जैन इंटरनेशनल रेजिडेंशियल स्कूल (जेआईआरएस) के पीजीटी फिजिक्स शिक्षक, तिलक एम ने पेपर की समीक्षा करते हुए इसे छात्रों के अनुकूल बताया. उनके अनुसार, जहां MCQ सेक्शन के कुछ प्रश्न सीधे थे, वहीं सेक्शन B में 'मूविंग चार्जेस' से संबंधित टॉर्क का सवाल औसत स्तर की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए थोड़ा कठिन साबित हो सकता था. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सेक्शन C के न्यूमेरिकल 'मल्टी-स्टेप' थे, जिन्हें हल करने के लिए गहरी विश्लेषणात्मक क्षमता की आवश्यकता थी. विशेषज्ञों का मानना है कि केस स्टडी के प्रश्न रटने के बजाय छात्रों की विषयगत समझ परखने के लिए डिजाइन किए गए थे.
छात्रों के लिए सबसे अधिक स्कोरिंग 'सेक्शन E' रहा, जिसमें इलेक्ट्रोस्टैटिक्स, रे ऑप्टिक्स, EMI और AC जैसे अध्यायों से महत्वपूर्ण डेरिवेशन पूछे गए थे. अपेक्षित डेरिवेशन आने से छात्रों को काफी राहत मिली. कुल मिलाकर, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह परीक्षा शानदार अवसर लेकर आई है. बोर्ड को उम्मीद है कि इस संतुलित दृष्टिकोण से छात्रों के औसत परिणामों में सुधार देखने को मिलेगा.