नई दिल्ली: पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत में साफ कर दिया था कि भारत अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष को जल्द समाप्त होते देखना चाहता है. सरकार ने यह जानकारी पश्चिम एशिया के हालात पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं को दी.
अहम बैठक के दौरान सरकार ने बताया कि भारत का मानना है कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक असर वाला है. इसलिए जल्द से जल्द तनाव कम होना और शांति बहाल होना जरूरी है. इस मुद्दे पर भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है.
बैठक में विपक्षी नेताओं ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर सवाल उठाए. इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि यह कोई नई स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले भी ऐसी भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है.
जयशंकर ने साफ कहा कि भारत किसी भी परिस्थिति में 'दलाल देश' की भूमिका नहीं निभा सकता. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत फैसले लेता है और किसी अन्य देश के पीछे जाकर मध्यस्थता की पेशकश नहीं करता.
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा हुई. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात पर उपयोगी विचार-विमर्श हुआ. उन्होंने कहा कि भारत शांति, स्थिरता और तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करता है. और साथ ही दोनों देशों ने इस मुद्दे पर आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनियों में से एक है. ट्रंप ने हाल ही में इसे खुला रखने के लिए सख्त अल्टीमेटम दिया था. यदि यह रास्ता बंद होता है तो इसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है. पीएम मोदी ने भी संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट कर दिया है कि कर्मशियल जहाजों और नागरिकों पर होने वाले हमलों को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा.
ईरान युद्ध को शुरू हुए लगभग एक महीना बीत चुका है. 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई कद्दावर नेताओं की मौत हो गई है. इस भारी क्षति के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहरा गया है. अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप और मोदी की यह पहल युद्ध विराम की राह खोलेगी?