नई दिल्ली: वैश्विक चुनौतियां दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. इसी बीच भारतीय सेना अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है. आईबीजी के गठन से विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेना की हमलावर ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. यह बदलाव चीन की सीमा पर उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी जवाब देने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
सेना के उच्चाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक आईबीजी की अवधारणा पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की दूरदर्शिता का परिणाम है. जिसका परीक्षण अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में पहले ही हो चुका है. अब सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को तेजी से अमल में लाया जाएगा.
आईबीजी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ये समूह महज 12 घंटों के अंदर सटीक और घातक हमले करने में सक्षम होंगे. वर्तमान में सेना की एक डिवीजन को युद्ध के लिए तैयार करने में लगभग दो दिन लगते हैं, जो सीमा पर त्वरित कार्रवाई के लिए बाधा बन जाता है. आईबीजी में 4500 से 5000 सैनिकों की टीम होगी, जो ब्रिगेड (3000-3500 सैनिक) से बड़ी लेकिन डिवीजन (10-12 हजार सैनिक) से छोटी होगी. इसमें पैदल सेना, तोपखाना, बख्तरबंद वाहन, इंजीनियरिंग इकाई, संचार विभाग और हवाई रक्षा जैसे विभिन्न अंग शामिल होंगे. सेना के विशेषज्ञों का कहना है कि ये समूह ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में युद्ध की विशेष चुनौतियों के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे, जिससे दुश्मन को चौंकाने वाली कार्रवाई संभव हो सकेगी.
चीन के साथ लगती सीमा पर तैनात माउंटेन स्ट्राइक कोर को सबसे पहले आईबीजी में परिवर्तित किया जाएगा. सेना के सूत्रों ने बताया कि अगले दो वर्षों में इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य है, ताकि रक्षा चुनौतियों का स्थायी समाधान निकाला जा सके. यह कदम लद्दाख से अरुणाचल तक के ऊंचे इलाकों में सेना की तैनाती को अधिक लचीला और प्रभावी बनाएगा. आईबीजी का गठन न केवल हमले की गति बढ़ाएगा बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित करेगा. पूर्व में जनरल रावत के कार्यकाल में इसकी अवधारणा पर काम शुरू हुआ था, लेकिन मंजूरी में विलंब के कारण अब जाकर इसे गति मिली है.
भारतीय सेनाएं वर्तमान में एकीकरण की व्यापक तैयारियों में व्यस्त हैं. यह प्रक्रिया आधार स्तर से शुरू की गई है, जिसमें पहले भैरव बटालियन का गठन, फिर रुद्र ब्रिगेड का निर्माण और अब आईबीजी का विकास शामिल है. सेना के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल यह एकीकरण थल सेना के भीतर ही हो रहा है, लेकिन भविष्य में वायु सेना और नौसेना के साथ भी संयुक्त एकीकरण की योजना है.