नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समझौते फोन कॉल पर नहीं, बल्कि रणनीतिक समझ और कूटनीति से होते हैं. इस पूरे विवाद ने भारत-अमेरिका संबंधों और अमेरिकी व्यापार नीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए व्यंग्य किया, 'हग हग ना रहा, पोस्ट पोस्ट ना रहा.' उनका इशारा प्रधानमंत्री की पूर्व अमेरिकी यात्राओं और सार्वजनिक कूटनीति की शैली की ओर था. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की व्यक्तिगत कूटनीति अब नाकाम साबित हो रही है और देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.
Hug हग ना रहा
Post पोस्ट ना रहा
क्या से क्या हो गया बेवफ़ा तेरे दोस्ती में pic.twitter.com/ofy0ML28bx— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) January 9, 2026Also Read
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव के बयान को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की समझ से परे बताया. उन्होंने कहा कि यह मानना कि समझौते इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन किसे फोन करता है, बेहद अपरिपक्व सोच है. तिवारी ने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता केवल व्यापार नहीं, बल्कि सभ्यतागत और रणनीतिक आधार पर टिका है.
VIDEO | On reports suggesting the Indo-US trade deal failed as 'PM Modi did not call US President Trump', Congress MP Manish Tewari (@ManishTewari) says, “India and the United States share a deep civilisational and strategic relationship, not limited to the Asia-Pacific alone. To… pic.twitter.com/F6Vv2whQ59
— Press Trust of India (@PTI_News) January 9, 2026
मनीष तिवारी ने कहा कि अमेरिका को भारत की एशिया पैसिफिक और वैश्विक रणनीतिक भूमिका को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी प्रशासन इस रिश्ते की अहमियत को समझते रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे नजरअंदाज करता दिख रहा है. उनके अनुसार भारत केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन का अहम स्तंभ है.
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि भारत अमेरिका ट्रेड डील इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया. उन्होंने कहा कि डील लगभग तय थी, लेकिन नेतृत्व स्तर पर सीधी बातचीत नहीं हो सकी. लुटनिक के अनुसार भारत समय रहते फैसला नहीं कर पाया.
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी से ट्रेड बातचीत चल रही थी. 2025 में कई दौर की आमने सामने बातचीत हुई, जिसमें दिसंबर में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत भी आया. समझौता न होने के कारण भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लागू है. इसमें रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है. यह स्थिति दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर दबाव बना रही है.