महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने की चर्चाओं के बीच अब पवार परिवार को लेकर भी अहम संकेत मिले हैं. उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने कहा है कि उनके और चाचा शरद पवार के बीच अब कोई मनमुटाव नहीं बचा है. उनके इस बयान से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी के दोनों गुट एक बार फिर साथ आ सकते हैं.
एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में अजित पवार ने साफ कहा कि दोनों एनसीपी के कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी एकजुट हो. उन्होंने कहा कि परिवार और राजनीति से जुड़े सभी तनाव अब खत्म हो चुके हैं. अजित पवार के मुताबिक, जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए यह एक जरूरी कदम है.
एनसीपी के दोनों गुटों ने पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने का फैसला किया है. इसे दोनों गुटों के बीच बढ़ती नजदीकी का बड़ा संकेत माना जा रहा है. लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने भी बताया कि यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं की मांग पर लिया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर पार्टी का प्रदर्शन बेहतर हो सके.
हालांकि सुप्रिया सुले ने यह भी स्पष्ट किया कि यह गठबंधन आगे भी जारी रहेगा या नहीं, इस पर अभी कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है . फिलहाल यह सहयोग केवल नगर निगम चुनाव तक सीमित है.
गौरतलब है कि एनसीपी की स्थापना 1999 में शरद पवार ने की थी लेकिन करीब दो साल पहले अजित पवार के अलग होने से पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी. अजित पवार के गुट ने एनडीए के साथ गठबंधन किया और उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिला. वहीं शरद पवार के गुट को नया नाम और नया चुनाव चिन्ह मिला.
अब अजित पवार के ताजा बयान से यह साफ है कि महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं. अगर दोनों एनसीपी गुट पूरी तरह एक होते हैं, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर साफ दिख सकता है.