नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार हमेशा एक अहम कड़ी रहा है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही थी, जो कई कारणों से अटक गई थी.
अब सूत्रों का कहना है कि इस दिशा में बड़ी सफलता मिली है. बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और माहौल सकारात्मक बना हुआ है. अगर अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह समझौता दोनों देशों के लिए बड़ा आर्थिक फायदा ला सकता है.
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर ज्यादातर बातचीत पूरी हो चुकी है. अब सिर्फ दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति मिलनी बाकी है. सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्ष लगातार संपर्क में हैं और समझौते को साकार करने के काफी करीब पहुंच चुके हैं. इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए अहम कदम माना जा रहा है.
यह व्यापार समझौता पिछले साल उस वक्त अटक गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाया था. इसके बाद रूसी तेल खरीद को लेकर भी अतिरिक्त शुल्क लगाए गए, जिससे बातचीत में रुकावट आई. इन फैसलों का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ा और समझौता आगे नहीं बढ़ पाया.
सूत्रों के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को अमेरिका से दूरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. भारत के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों ही अहम बाजार हैं. अधिकारियों का कहना है कि भारत दोनों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है और किसी एक को दूसरे के मुकाबले कम अहम नहीं माना जा रहा.
फरवरी के पहले हफ्ते में विदेश मंत्री की वाशिंगटन यात्रा प्रस्तावित है. इस दौरान द्विपक्षीय बैठक की संभावना भी जताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह यात्रा व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मददगार साबित हो सकती है. बैठक में अहम खनिजों और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होनी है.
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजारों में से एक है. यूरोपीय संघ को भारत का निर्यात 76 अरब डॉलर का है, जबकि अमेरिका को 86 अरब डॉलर का. दोनों बाजारों में निर्यात बढ़ने से रोजगार और उद्योग को फायदा होगा. यही वजह है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को भारत खास अहमियत दे रहा है.