नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने संकट खड़ा कर दिया है. भारत अपनी जरूरत का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है, जिससे आपूर्ति बाधित हुई है. देश में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर जारी चर्चाओं के बीच कालाबाजारियों पर नकेल कसने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने बड़ा अभियान शुरू किया है. सरकार की इस सख्त कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को घबराहट से बचाना और घरेलू गैस आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है.
कालाबाजारी के खिलाफ अभियान के तहत अब तक देशभर में एक लाख से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे गए हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रवर्तन इकाइयों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 52,000 से अधिक गैस सिलेंडर जब्त किए हैं. इस अवैध धंधे में शामिल लोगों पर 850 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं और अब तक 220 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सरकार की तरफ से स्पष्ट सन्देश दिया गया है कि कालाबाजारी करने वालों को किसी भी हाल में नहीं बख्सा जाएगा.
यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार संकट के समय उपभोक्ताओं के हितों से समझौता नहीं करेगी. वितरकों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तेल कंपनियों ने केवल कालाबाजारियों पर ही नहीं, बल्कि संदिग्ध वितरकों पर भी कड़ी नजर रखी है. औचक निरीक्षण के बाद 1,500 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. लापरवाही बरतने वाले 118 एलपीजी वितरकों पर भारी जुर्माना लगाया गया है, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले 41 वितरकों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जमाखोरी और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखें.
भले ही आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा चुनौतीपूर्ण मार्ग से आता है, लेकिन सरकार ने फिलहाल घरेलू एलपीजी आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने का दावा किया है. हालांकि, भू-राजनीतिक स्थिति के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वितरकों के स्तर पर अभी तक आपूर्ति बंद होने की कोई शिकायत नहीं मिली है. सरकार भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं और कूटनीतिक समाधानों पर निरंतर कार्य कर रही है.