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भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को क्यों खारिज किया? जानें 1947 से शुरू हुआ पूरा विवाद

पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा सहयोग के लिए बनाए गए तथाकथित संयुक्त आयोग को भारत ने कानूनी आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है. विवाद की जड़ 1947-48 के बाद जम्मू-कश्मीर के विभाजन और 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते में है. तो चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

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Edited By: Shanu Sharma
भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को क्यों खारिज किया? जानें 1947 से शुरू हुआ पूरा विवाद
Courtesy: ANI

भारत ने बुधवार को पाकिस्तान और चीन के बीच गठित तथाकथित पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस व्यवस्था का कोई कानूनी आधार नहीं है. 

जायसवाल का कहना था कि भारत के जिन क्षेत्रों को पाकिस्तान ने अपने कब्जे में रखा है, उनके संबंध में पाकिस्तान किसी तीसरे देश के साथ सीमा संबंधी समझौता करने का अधिकार नहीं रखता. यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान और चीन के बीच जिस सीमा की बात की जा रही है, उसका बड़ा हिस्सा उस क्षेत्र से जुड़ा है जिसे भारत जम्मू-कश्मीर का अपना हिस्सा मानता है.

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने 1947-48 के संघर्ष के बाद जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा किया और बाद में उसी क्षेत्र से संबंधित चीन के साथ समझौता किया. इस पूरे विवाद को समझने के लिए 1947 के भारत विभाजन के बाद की स्थिति को देखना जरूरी है. जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में भारत के साथ विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष हुआ.

1947-48 के युद्ध के बाद जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया. भारत का आधिकारिक रुख तब से यह रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और पाकिस्तान का उन क्षेत्रों पर कब्जा अवैध है. इसी आधार पर नई दिल्ली पाकिस्तान को उन क्षेत्रों के संबंध में किसी अन्य देश के साथ क्षेत्रीय समझौता करने का अधिकार नहीं देता.

1963 में चीन-पाकिस्तान के बीच हुआ सीमा समझौता

विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 2 मार्च 1963 था. इसी दिन चीन और पाकिस्तान ने एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए. समझौते में चीन के शिनजियांग और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले सटे हुए इलाकों के बीच सीमा का निर्धारण किया गया. भारत ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के अपने कब्जे वाले क्षेत्र से करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र चीन को सौंप दिया था. यह क्षेत्र शक्सगाम घाटी के नाम से जाना जाता है. भारत आज भी इसे अवैध और अमान्य समझौता मानता है. यही कारण है कि भारत के लिए चीन-पाकिस्तान सीमा संबंधी कोई भी नया तंत्र केवल दो देशों के बीच सामान्य सीमा सहयोग का मामला नहीं है. इसमें भारतीय दावे वाले क्षेत्र सीधे जुड़े हुए हैं.