नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिए एक नया अध्याय शुरू हो गया है. भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को पेट्रापोल-बेनापोल सीमा मार्ग से बांग्लादेश पहुंचे. खास बात यह रही कि वह अपना ट्रॉली बैग खुद लेकर सीमा पार करते नजर आए. उनके साथ उनकी पत्नी मृणाल त्रिवेदी भी थीं. बांग्लादेश पहुंचने पर उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की इच्छा जताई. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के संबंध कई राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी अब बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे. वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय राजनेता हैं. शुक्रवार को जब वह पेट्रापोल-बेनापोल भूमि सीमा के रास्ते बांग्लादेश पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों और लोगों का ध्यान उनकी सादगी ने खींचा.
सीमा द्वार खुलने के बाद वह अपना सामान खुद लेकर बांग्लादेश में दाखिल हुए. वहां बांग्लादेश सरकार और भारतीय उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. सीमा पार करने के बाद उन्होंने संक्षिप्त बातचीत में कहा कि बांग्लादेश आकर उन्हें खुशी हो रही है और वह दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे.
दिनेश त्रिवेदी ने भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी प्रणय कुमार वर्मा का स्थान लिया है जिनका चार वर्ष का कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है. वर्मा के कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले... अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में कुछ चुनौतियां सामने आईं. इस वर्ष हुए आम चुनाव में अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली और 17 फरवरी को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. ऐसे माहौल में त्रिवेदी की नियुक्ति को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बांग्लादेश पहुंचने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश खेल, स्वास्थ्य, तकनीक तथा अन्य क्षेत्रों में एक-दूसरे की प्रतिभा और संसाधनों का उपयोग कर नई संभावनाएं पैदा कर सकते हैं. उनका मानना है कि किसी एक देश की शक्ति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि दोनों देशों के मिलकर काम करने से जो सामूहिक शक्ति पैदा होती है, वही सबसे बड़ी ताकत होती है. उन्होंने विश्वास जताया कि यदि दोनों पड़ोसी देश साथ मिलकर आगे बढ़ें तो दुनिया के सामने सहयोग और विकास का एक मजबूत उदाहरण पेश किया जा सकता है.