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गुरु संग्युसंग पोंगनर को मिलेगा 2026 का पद्म श्री पुरस्कार, Ao–Naga समुदाय की लोक कलाओं को सहेजने के लिए मिली प्रसिद्धि

गुरु संग्युसंग पोंगनर ने अपना अधिकांश जीवन Ao–Naga समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को बचाने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने में लगाया है.  वे नगा वाडिर वेलफेयर कल्चरल क्लब के सह-संस्थापकों में शामिल हैं.  

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
गुरु संग्युसंग पोंगनर को मिलेगा 2026 का पद्म श्री पुरस्कार, Ao–Naga समुदाय की लोक कलाओं को सहेजने के लिए मिली प्रसिद्धि
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देश की सांस्कृतिक पहचान केवल बड़े शहरों या प्रसिद्ध संस्थानों से नहीं बनती, बल्कि उन लोगों से भी बनती है जो अपनी परंपराओं को पीढ़ियों तक जीवित रखते हैं.  नागालैंड के गुरु संग्युसंग पोंगनर ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने छह दशकों से अधिक समय तक Ao–Naga लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का कार्य किया.  उनके इसी योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2026 के पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है.  यह सम्मान उनके लंबे सांस्कृतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. 

लोक विरासत को बनाया जीवन का उद्देश्य

गुरु संग्युसंग पोंगनर ने अपना अधिकांश जीवन Ao–Naga समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को बचाने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने में लगाया है.  वे नगा वाडिर वेलफेयर कल्चरल क्लब के सह-संस्थापकों में शामिल हैं.  संस्था की स्थापना के समय से ही वे इसके महासचिव के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.  उनके नेतृत्व में लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत और सामुदायिक आयोजनों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया.  उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज की पहचान और भविष्य की दिशा भी होती है. 

हजारों युवाओं को दी कला की शिक्षा

गुरु पोंगनर का योगदान केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा.  उन्होंने वर्षों तक युवाओं को लोक कला की बारीकियां सिखाने का काम भी किया.  अब तक वे 2,000 से अधिक युवा कलाकारों को प्रशिक्षण दे चुके हैं.  इसके अलावा 100 से ज्यादा शिष्यों को उन्होंने व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया है.  उनके प्रयासों का परिणाम यह रहा कि कई युवा कलाकार आज पारंपरिक कला को पेशेवर रूप से आगे बढ़ा रहे हैं.  उनकी शिक्षा ने केवल कलाकार तैयार नहीं किए, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के नए संरक्षक भी तैयार किए हैं. 

मौलिक रचनाओं से मिली व्यापक पहचान

Ao–Naga लोक कला के क्षेत्र में गुरु पोंगनर की पहचान उनकी मौलिक रचनाओं और नवाचारपूर्ण सोच के कारण बनी.  उन्होंने ऐसी लोक प्रस्तुतियां तैयार कीं जिनमें पारंपरिक मूल्यों के साथ रचनात्मकता का संतुलन दिखाई देता है.  उनकी रचनाओं का मंचन स्थानीय आयोजनों से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों तक किया गया है.  यही वजह है कि उनका नाम नागालैंड की सीमाओं से निकलकर व्यापक सांस्कृतिक जगत में जाना जाता है.  उनकी कला ने लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर दिया है. 

23 जून को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान

राष्ट्रपति भवन में 23 जून 2026 को आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गुरु संग्युसंग पोंगनर को पद्म श्री सम्मान से अलंकृत करेंगी.  यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान के साथ-साथ Ao–Naga समुदाय की सांस्कृतिक समृद्धि को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा.  सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यह सम्मान उन सभी कलाकारों के लिए प्रेरणा है जो अपनी परंपराओं को सहेजने के लिए लगातार काम कर रहे हैं.  गुरु पोंगनर की उपलब्धि यह साबित करती है कि समर्पण और धैर्य से किया गया सांस्कृतिक कार्य भी राष्ट्रीय गौरव का कारण बन सकता है.