नई दिल्ली: भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली है, जो 29 सितंबर से प्रभावी हुई थी. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी घोषणा की. इस छूट से भारत को अपने रणनीतिक और व्यापारिक हितों को संतुलित करने का अवसर मिलेगा.
इससे पहले, अमेरिका ने ट्रम्प प्रशासन के दौरान 2018 में दी गई छूट को रद्द करने का ऐलान किया था, जिससे भारत की परियोजना में भूमिका पर दबाव बढ़ गया था.
भारत के लिए यह छूट ऐसे समय आई है जब वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अपनी क्षेत्रीय रणनीति को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है. छह महीने की इस छूट से भारत को चाबहार बंदरगाह पर संचालन जारी रखने की अनुमति मिलती है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच का एक अहम केंद्र है. विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की आर्थिक और रणनीतिक प्रतिबद्धता के लिए 'महत्वपूर्ण राहत' बताया है.
अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने 16 सितंबर को घोषणा की थी कि वह 2018 में दी गई छूट को रद्द करेगा. यह कदम ईरान के खिलाफ 'मैक्सिमम प्रेशर' अभियान का हिस्सा था. इस फैसले के बाद नई दिल्ली पर यह दबाव बढ़ गया कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोग को कैसे आगे बढ़ाए. अब नई छूट के साथ भारत को अस्थायी रूप से परियोजना संचालन की अनुमति मिली है.
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए केवल एक व्यापारिक ठिकाना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक द्वार है. यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बाईपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है. इस मार्ग के जरिए भारत न केवल क्षेत्रीय व्यापार बढ़ा सकता है बल्कि ऊर्जा और सुरक्षा हितों को भी मजबूत कर सकता है. यही कारण है कि भारत इस परियोजना को अपनी 'पड़ोसी नीति' का अहम हिस्सा मानता है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा था कि छूट की समाप्ति राष्ट्रपति ट्रम्प की ईरान को अलग-थलग करने की नीति के अनुरूप है. बयान में कहा गया, 'छूट रद्द होने के बाद जो भी व्यक्ति चाबहार पोर्ट पर संचालन या संबंधित गतिविधियों में शामिल होंगे, वे प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं.' इस चेतावनी ने भारत को अपनी नीति में संतुलन साधने के लिए मजबूर कर दिया.
हालांकि यह छूट भारत के लिए अस्थायी राहत है, लेकिन आने वाले छह महीने उसके लिए चुनौतीपूर्ण रहेंगे. नई दिल्ली को इस अवधि में वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अपने संबंधों को सावधानीपूर्वक साधना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस छूट का उपयोग परियोजना की गति बढ़ाने और भविष्य में स्थायी समाधान खोजने में करेगा.