कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर सामने आई एक ताजा रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. चुनावी सुधारों पर काम करने वाले संगठन की ओर से जारी इस अध्ययन में राज्य के अधिकांश विधायकों की पृष्ठभूमि का विश्लेषण किया गया है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़ी संख्या में विधायकों ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामलों का जिक्र किया है. और साथ ही यह भी सामने आया कि कई विधायक आर्थिक रूप से काफी संपन्न हैं. इस रिपोर्ट ने राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को फिर से तेज कर दिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 294 में से 291 विधायकों की पृष्ठभूमि का अध्ययन किया गया. इनमें से 136 विधायकों यानी लगभग 47 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है. इनमें से 109 विधायकों पर गंभीर आरोप दर्ज हैं. अध्ययन में यह भी सामने आया कि कुछ विधायकों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास जैसे मामले भी दर्ज हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि आठ विधायकों ने हत्या से जुड़े मामलों का जिक्र किया है, जबकि 29 विधायकों पर हत्या के प्रयास के आरोप दर्ज हैं. इसके अलावा 22 विधायकों के खिलाफ महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले भी सामने आए हैं. इनमें एक मामला बलात्कार से संबंधित बताया गया है. इन आंकड़ों ने राजनीतिक व्यवस्था में आपराधिक मामलों की मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
दलीय आधार पर आंकड़ों को देखें तो सत्तारूढ़ दल के कई विधायकों ने भी अपने हलफनामों में आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है. वहीं, विपक्षी दल के विधायकों में भी बड़ी संख्या ऐसे नेताओं की है जिनके खिलाफ केस दर्ज हैं. इससे यह साफ होता है कि यह समस्या किसी एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीति के कई हिस्सों में दिखाई देती है.
रिपोर्ट में विधायकों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया गया है. कुल 291 विधायकों में से 152 यानी करीब 52 प्रतिशत विधायक करोड़पति बताए गए हैं. सभी विधायकों की कुल घोषित संपत्ति लगभग 821.5 करोड़ रुपये बताई गई है. औसतन हर विधायक के पास करीब 2.82 करोड़ रुपये की संपत्ति है. इसके अलावा शिक्षा के मामले में 63 प्रतिशत विधायक स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि कुछ की पढ़ाई आठवीं से बारहवीं कक्षा तक है.