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आसान नहीं होगी मोदी सरकार की राह, बंगाल की CM ममता बनर्जी ने पत्र लिखकर कर डाली बड़ी मांग

Modi 3.0 Gov: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व वाली एनडीए सरकार की राह आसान नहीं होने वाली है. आगामी संसद सत्र को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक विशेष तैयारी कर रहा है. इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीनों आपरधिक बिल्स के क्रियान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया है.

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CM Mamata Banerjee
Courtesy: Social Media

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे तीन जल्दबाजी में पारित आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्षरता अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023  के कार्यान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया है.  सीएम ममता ने कहा कि इन बिल्स को असहमति के नोट्स को अनदेखा करने के बाद पारित किया गया था. इस दौरान दोनों सदनों से अनुचित तरीके से 146 सांसदों को सदन निष्काषित कर दिया गया था. तीनों नए कानून 1 जुलाई से लागू होने वाले हैं. 

बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का पत्र विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की ओर से पहला हमला है. इंडिया गठबंधन का मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर संसद सत्र के पहले दिन से ही हमलावर होने का प्लान है जिससे सरकार को दबाव में लाया जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने बनर्जी से कोलकाता में उनके कार्यालय में मुलाकात की और आपराधिक कानूनों पर लिखे गए पत्र पर चर्चा की. इंडिया गठबंधन के तमाम दल एनडीए सरकार पर कई अन्य विधेयकों की समीक्षा करने के लिए भी दबाव बनाने पर काम कर रहे हैं. 

इन कानूनों पर समीक्षा कराएगा विपक्ष 

राज्यसभा में टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने शुक्रवार को 17 वीं लोकसभा में पारित आपराधिक कानूनों के अलावा कम से कम पांच ऐसे कानूनों की सूची दी है, जिनकी विपक्ष सरकार से समीक्षा करवाना चाहता है. इन कानूनों में शामिल हैं नागरिकता संशोधन अधिनियम, चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम और विमान अधिनियम (1934).  सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से पी चिदंबरम अगले हफ्ते कई अन्य विधेयकों की सूची पेश करेंगे जिसमें केंद्र सरकार से समीक्षा की मांग की जाएगी.