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India Daily

बाढ़ से अंधेरे में डूबा नेपाल, रोशनी बनकर आगे आया भारत; 31 दिसंबर तक रोज 18 घंटे देगा बिजली

नेपाल में आई बाढ़ ने वहां की पनबिजली व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है. ऐसे समय में भारत ने नेपाल की मदद के लिए 31 दिसंबर तक रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है.

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Edited By: Reepu Kumari
बाढ़ से अंधेरे में डूबा नेपाल, रोशनी बनकर आगे आया भारत; 31 दिसंबर तक रोज 18 घंटे देगा बिजली
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: नेपाल में हाल की बाढ़ ने वहां के पनबिजली ढांचे को नुकसान पहुंचाया है. इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ा और घरेलू स्तर पर उपलब्ध बिजली की क्षमता प्रभावित हुई. ऐसे मुश्किल वक्त में भारत ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है. विद्युत मंत्रालय ने 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है. इससे नेपाल को बाढ़ के बाद पैदा हुई बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी.

इतने मेगावाट तक बिजली सप्लाई करने का फैसला

भारत की मंजूरी के तहत नेपाल को दो अलग-अलग बिजली लाइनों के जरिए आपूर्ति की जाएगी. मुजफ्फरपुर-ढल्केबर 400 केवी डी/सी लाइन से 600 मेगावाट तक बिजली भेजने की अनुमति है. वहीं, टनकपुर-महेंद्रनगर 132 केवी एस/सी लाइन के जरिए 54 मेगावाट तक बिजली निर्यात किया जा सकेगा. दोनों लाइनों की अधिकतम क्षमता को मिलाकर नेपाल को कुल 654 मेगावाट तक बिजली भेजी जा सकती है.

दो लाइनों से पहुंचेगी बिजली

नेपाल तक बिजली पहुंचाने में दोनों ट्रांसमिशन लाइनों की अहम भूमिका होगी. पहली मुजफ्फरपुर-ढल्केबर लाइन से 600 मेगावाट तक और दूसरी टनकपुर-महेंद्रनगर लाइन से 54 मेगावाट तक बिजली भेजी जा सकेगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर समय 654 मेगावाट बिजली भेजी जाएगी. मंजूरी तय अधिकतम क्षमता के आधार पर है और वास्तविक आपूर्ति निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होगी.

रात से शाम तक 18 घंटे की व्यवस्था

मंजूरी के मुताबिक नेपाल को रोजाना 18 घंटे बिजली निर्यात की जा सकेगी. यह व्यवस्था रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक लागू रहेगी. बिजली निर्यात 13 सितंबर से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगा. यानी फिलहाल यह फैसला साल के अंत तक के लिए किया गया है. जनवरी 2027 में बिजली निर्यात की मात्रा कितनी होगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

दिसंबर में फिर होगा फैसला

जनवरी 2027 के लिए बिजली निर्यात की मात्रा दिसंबर में होने वाली समीक्षा के बाद तय की जाएगी. फिलहाल 31 दिसंबर 2026 तक की मंजूरी ही लागू है. बाढ़ से नेपाल की घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बीच भारत की यह व्यवस्था उसकी तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है. साथ ही, इस कदम से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

नेपाल की जरूरत में भारत का साथ

नेपाल में बाढ़ से प्रभावित पनबिजली परियोजनाओं और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है. ऐसे में भारत से मिलने वाली बिजली वहां की मौजूदा जरूरत को पूरा करने में सहायक होगी. विद्युत मंत्रालय के मुताबिक, यह सहयोग दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों को भी मजबूत करेगा. भारत ने नेपाल को सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है. फिलहाल बिजली निर्यात की व्यवस्था 31 दिसंबर तक रहेगी और इसके बाद की तस्वीर दिसंबर की समीक्षा से साफ होगी.