US Israel Iran War IMD Weather

फेक सरोगेसी और बच्चा बेचने वाले रैकेट का पर्दाफाश, हैदराबाद पुलिस ने डॉक्टर समेत 8 लोगों को किया गिरफ्तार

Hyderabad Baby Selling Racket: हैदराबाद में एक मामला सामने आया है, जिसमें एक फर्टिलिटी क्लिनिक में एक अवैध सरोगेसी और बच्चे का रैकेट चल रहा था. 

Shilpa Srivastava

Hyderabad Baby Selling Racket: हैदराबाद पुलिस ने एक चौंकाने वाली घटना का खुलासा किया है. इस मामले में एक फर्टिलिटी क्लिनिक से एक अवैध सरोगेसी और बच्चा बेचने वाला रैकेट का पर्दाफाश किया गया. इस घोटाले का पता तब चला जब एक कपल को डीएनए टेस्ट के जरिए पता चला कि सरोगेसी प्रक्रिया से उन्हें जो बच्चा मिला है, वह बायोलॉजिकली उनका नहीं है. उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई. 

पुलिस ने बताया कि इस रैकेट का मेन कैरेक्टर डॉ. नम्रता नाम की एक डॉक्टर है. वह एक फर्टिलिटी क्लिनिक चलाती थी. वो अपने एजेंटों की मदद से एक ग्रुप के साथ मिलकर एबॉर्शन कराने वाली महिलाओं से कॉन्टैक्ट करती थीं. वो उनको गर्भपात कराने में मदद करने के बजाय, इसके बदले उन्हें पैसे देने को कहती थीं. 

सरोगेसी से पैदा होने का झूठा दावा करती थी डॉक्टर:

इसके बाद डॉ. नम्रता इन बच्चों को कानूनी सरोगेसी से पैदा होने का झूठा दावा करती थीं और कपल्स को बच्चा बेच देती थीं. बता दें कि अब तक, पुलिस ने डॉक्टर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा पुलिस ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है. 

पुलिस ने कहा कि यह कपल अगस्त 2024 में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए क्लिनिक आया था. कई टेस्टों के बाद डॉ. नम्रता ने उन्हें बताया कि वो नैचुरल तरीके से बच्चा पैदा नहीं कर सकते हैं. ऐसे में उन्हें डॉक्टर ने सरोगेसी का सुझाव दिया. कपल सरोगेसी के लिए राजी हो गए. इसके बाद उन्हें विशाखापत्तनम स्थित क्लिनिक की एक दूसरी ब्रांच में भेज दिया गया. यहां क्लिनिक ने उनके मेडिकल सैंपल इक्ट्ठा किए. उन्हें बताया गया कि एक सरोगेट मां उनके बच्चे को जन्म देगी.

कपल ने दिए 35 रुपये से ज्यादा:

फिर अगले 9 महीनों में, कपल ने इलाज के लिए 35 लाख रुपये से ज्यादा का पेमेंट किया. जून 2025 में, क्लिनिक में उन्हें बताया कि सी-सेक्शन से सरोगेट को लड़का हुआ है. उन्हें बच्चा दिया गया, साथ ही ऐसे डॉक्यूमेंट्स भी दिए जो उन्हें बच्चे का बायोलॉजिकल माता-पिता बताते थे. लेकिन जन्म प्रमाण पत्र पूरी तरह से फेक था और बच्चा बायोलॉजिकल रूप से उनका नहीं था. इस मामले की जांच पुलिस कर रही है.