संसद के मॉनसून सत्र के छठे दिन आज, 28 जुलाई 2025 को लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित बहस शुरू होने जा रही है. यह 16 घंटे की मैराथन चर्चा दोपहर 12 बजे से शुरू होगी, जिसकी शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. इस दौरान सरकार अपने आक्रामक रुख के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीतियों को मजबूती से पेश करने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस चर्चा में हस्तक्षेप कर सकते हैं और सरकार का पक्ष रख सकते हैं.
'ऑपरेशन सिंदूर' का प्रारंभ 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के जवाब में हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. इस हमले के बाद भारतीय सेना ने त्वरित और सटीक कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. यह ऑपरेशन मात्र 22 मिनट में पूरा हुआ.
सरकार की तैयारी और रणनीति
इस चर्चा से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं. इन बैठकों में सरकार ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया है ताकि संसद में ऑपरेशन सिंदूर के हर पहलू को तथ्यपरक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके. गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे जैसे प्रमुख नेता भी इस बहस में हिस्सा लेंगे.
सरकार का इरादा इस चर्चा के माध्यम से न केवल ऑपरेशन की सफलता को रेखांकित करने का है, बल्कि विपक्ष के सवालों का भी करारा जवाब देने का है. सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बहस में आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और स्पष्ट करेगी.
विपक्ष की भूमिका और मांगें
विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन, ने लंबे समय से ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तृत चर्चा की मांग की है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस बहस में सरकार पर तीखे सवाल उठा सकते हैं. विपक्ष का कहना है कि पहलगाम हमले में सुरक्षा चूक हुई थी, जिसके लिए सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम के दावों पर भी विपक्ष ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ट्रंप ने कई बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पर चुप हैं.