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कैसे 12वीं फेल शख्स बना हैदराबाद का सबसे अमीर बिजनेसमैन?

Dr Murali Krishna Prasad Divi: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के एक शख्स इन दिनों चर्चा में हैं. जिस शख्स की चर्चा हो रही है, वे 12वीं फेल हैं, लेकिन उनकी गिनती हैदराबाद के सबसे अमीर लोगों में होती है.

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India Daily Live

Dr Murali Krishna Prasad Divi:  दिविज लैबोरेटरीज, आज वर्ल्ड लेबल पर टॉप 3 API (Active Pharmaceutical Ingredients) सप्लायर्स में से एक है. कंपनी की इस सफलता ने आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के एक किसान परिवार से आने वाले डॉ. दिवि को वर्ल्ड लेबल पर अमीरों की लिस्ट में शामिल कर दिया है. हम बात कर रहे हैं, दिविज लैबोरेटरीज के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर मुरली कृष्ण प्रसाद दिवि की. कोरोना के दौरान, अक्टूबर 2021 में उनकी संपत्ति करीब 75 हजार करोड़ तक पहुंच गई, तब डिवीज़ लैब्स के एक शेयर की कीमत 5,425 हो गया था. 

दिवि परिवार के पास कंपनी में लगभग 52% हिस्सेदारी है. डॉक्टर दिवि की कहानी की शुरुआत भी असफलता से शुरू हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टर दिवि 12वीं के परीक्षा में फेल हो गए थे. साथ ही वे अपनी बीफार्मा फर्स्ट इयर की परीक्षा भी पास नहीं कर पाए थे.

असफलता के बाद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और बीफार्मा करने के बाद एमफार्मा किया और 1975 में एक ट्रेनिंग के लिए वार्नर हिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. जल्द ही उन्हें डॉक्टर कल्लम अंजी रेड्डी के यूनिलॉइड्स के साथ काम करने का मौका मिला, जिन्होंने लिमिटेड इंटरप्राइजेज बनने के लिए इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स छोड़ दिया था.

कुछ समय बाद डॉ. दिवि जेब में सिर्फ 7 डॉलर लेकर अपनी किस्मत आजमाने के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया. वे कहते हैं कि उन दिनों आप विदेश में इतनी ही फॉरेन करेंसी ले जा सकते थे. 

1983 में पारिवारिक मामले के कारण लौटे भारत

1983 में एक पारिवारिक मामले के कारण डॉक्टर दिवि हैदराबाद वापस आए. फार्मा और बेहतरीन कैमिकल्स में अनुभव के साथ, उनकी मुलाकात फिर से डॉक्टर अंजी रेड्डी से हुई, जिन्होंने तब तक स्टैंडर्ड ऑर्गेनिक्स की नींव रख चुके थे. यहां कुछ दिनों के लिए डॉक्टर दिवि जीएम आर एंड डी के रूप में काम किया. जल्द ही उन्हें 1984 में एपीआई सप्लायर, केमिनोर ड्रग्स के अधिग्रहण में डॉ. रेड्डी के साथ पार्टनरशीप का मौका मिला और उसी साल डॉ. रेड्डीज लैब्स की भी नींव रखी गई.

को-प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में, डॉक्टर दिवि ने केमिनोर की कमान संभाली, जो दर्द की दवा इबुप्रोफेन और बाद में एंटासिड रेनिटिडाइन के लिए USFDA अप्रूवल प्राप्त करने वाली भारत की पहली API यूनिट बन गई. लेकिन 1990 में डॉक्टर दिवि ने दिविज रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत का फैसला किया. 

डॉक्टर दिवि का सबसे बड़ा दांव 1994 में आया, जब उन्होंने हैदराबाद के नलगोंडा में 71 करोड़ में एक ग्रीनफील्ड API प्लांट की नींव रखने में करीब 7 करोड़ का निवेश किया और इसे डिवीज़ लेबोरेटरीज का नाम दिया. उन्होंने बताया कि मैंने तब उधार लिया था. मैंने 1995 में IDBI से 35 करोड़ रुपये उधार लिया था, जिसे लगभग पांच वर्षों में चुका भी दिया. 

क्या है डॉक्टर दिवि की सफलता का मंत्र?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर दिवि के बेटे किरण एस दिवि ने कहा कि शुरू से ही हमने तय किया कि हम बड़ी फार्मा कंपनियों के साथ मुकदमेबाजी में नहीं पड़ेंगे. हम कभी भी पेटेंट का उल्लंघन नहीं करते हैं और हम अपने ग्राहकों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते हैं. ग्राहक भगवान हैं. हम दुनिया की शीर्ष 10 फार्मा कंपनियों में से 8 के साथ काम करते हैं. किरण एस दिवि दिविज लैब्स के सीईओ और ऑल टाइम डायरेक्टर हैं. 

डॉक्टर दिवि की बेटी और ऑल टाइम डायरेक्टर (कॉमर्शियल) नीलिमा एस दिवि का कहना है कि आज, डिविज़ लैब्स एक कर्ज मुक्त कंपनी है, जिसके पास लगभग 4,000 करोड़ की नकदी है. डिवीज़ लैब्स अब पेप्टाइड्स, विशेष रूप से जीएलपी -1 (ग्लूटाइड्स) समेत ग्रीन कैमेस्ट्री प्रिंसिपल का यूज करके उभरते अवसरों के लिए एक प्ले बना रही है, जिसका यूज मोटापे से निपटने के लिए किया जा रहा है.

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