नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन ने एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने स्वागत में राज्य सरकार के किसी भी प्रतिनिधि के मौजूद न होने पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का दुख जताया था. इसके जवाब में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती है, लेकिन चुनाव के समय और जानकारी के अभाव में हर कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए मुमकिन नहीं है.
ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस समय धरने पर बैठी हैं और उन्हें उस विशिष्ट कार्यक्रम की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी. उन्होंने तर्क दिया कि आयोजकों या फंडिंग के बारे में राज्य सरकार को सूचित नहीं किया गया था. मुख्यमंत्री के अनुसार- 'राष्ट्रपति का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन व्यस्त चुनावी माहौल में जनता के अधिकारों के लिए लड़ना उनकी पहली प्राथमिकता है.' उन्होंने प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को लेकर दी गई जानकारी को भी पूरी तरह गलत बताया.
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मू पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें भाजपा की नीतियों के जाल में फंसाया गया है. ममता ने कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को भाजपा का राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. उनके मुताबिक केंद्र की प्राथमिकता केवल राजनीति करना है. जबकि उनकी सरकार के लिए बंगाल की जनता और उनके हित सबसे ऊपर हैं. यह पूरी तरह राजनीतिक द्वेष है.
ममता बनर्जी ने आदिवासियों के हितों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से कड़े सवाल पूछे. उन्होंने पूछा कि जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे, तब राष्ट्रपति क्यों खामोश थीं? इसके अलावा उन्होंने राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासियों के खिलाफ हुए कथित अत्याचारों के मामलों का भी जिक्र किया. ममता ने पूछा कि इन गंभीर सामाजिक मुद्दों पर राष्ट्रपति ने अब तक सवाल क्यों नहीं उठाए और उनकी चुप्पी का कारण क्या है? क्या ये भाजपा का प्रभाव है?
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि चुनाव से ठीक पहले उनके साथ राजनीति न की जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने किसी भी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की है. संथाल सम्मेलन से सरकार का कोई सीधा संबंध नहीं था, इसलिए मंत्रियों की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाना गलत है. बनर्जी ने दोहराया कि साल में एक-दो बार आने पर स्वागत संभव है, लेकिन लगातार दौरों और चुनावी व्यस्तता के बीच हर बार प्रोटोकॉल निभाना कठिन है.
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल के छोटा होने और प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर दुख जताया था. उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश के राष्ट्रपति पद के लिए तय गरिमा और नियमों का पालन होना अनिवार्य है. मुर्मू की इस टिप्पणी ने ही ममता बनर्जी को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने और केंद्र पर पलटवार करने का मौका दिया है. इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है.