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India Daily

हिजाब लगाना सही, बिंदी-तिलक पर रोक? TCS के बाद लेंसकार्ट स्टाइल गाइड को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल

टीसीएस के बाद अब लेंसकार्ट में अपने हिंदू कर्मचारियों के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. कंपनी का स्टाइल गाइड वायरल हो रहा है. जिसमें हिजाब की इजाजत दी गई है लेकिन बिंदी-तिलक पर रोक लगाया गया है.

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Edited By: Shanu Sharma
हिजाब लगाना सही, बिंदी-तिलक पर रोक? TCS के बाद लेंसकार्ट स्टाइल गाइड को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल
Courtesy: x (@divya_gandotra)

टीसीएस के बाद आईवियर कंपनी लेंसकार्ट से जुड़ा मामला इस समय सुर्खियों में हैं. जिसमें कंपनी के कर्मचारियों के लिए दी गई स्टाइल गाइड को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा विवाद छिड़ गया है. फिल्म निर्माता और निर्देशक अशोक पंडित ने कंपनी पर हिंदू कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है और इस कंपनी के प्रोडक्ट को बायकॉट करने की अपील की है. 

अशोक पंडित ने दावा किया कि कंपनी हिजाब पहनने की अनुमति दे रही है, लेकिन बिंदी, तिलक और कलावा जैसे हिंदू पारंपरिक चिह्नों पर पूरी तरह रोक लगा रही है. जो की हिंदू भावनाओं के खिलाफ है. 

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट 

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल अपने कर्मचारियों से कहते हैं कि हिजाब करना ठीक है, लेकिन बिंदी, तिलक या कलावा नहीं लगाया जा सकता है. उन्होंने स्टाइल गाइड का कथित 11वां पन्ना भी शेयर किया, जिसमें साफ तौर पर लिखा नजर आ रहा है कि धार्मिक टीका, तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की इजाजत नहीं है. हालांकि नजर आ रहे तस्वीर में हिजाब के लिए नियम दिए गए थे. 

मेहंदी से लेकर बिंदी तक पर रोक?

कथित दस्तावेज के अनुसार, मेहंदी लगाने पर भी रोक है. खास मौकों पर केवल 10 दिन तक मैनेजमेंट की अनुमति से ही लगाई जा सकती है. कंपनी ने टोपी या हैट पहनने पर भी पाबंदी लगाई हुई थी. इसके अलावा स्टोर पर ब्लू टॉर्च और स्प्रे बोतल रखने, बाल अस्त-व्यस्त होने पर हेयर नेट इस्तेमाल करने और टैटू छिपाने के लिए काली फिटेड टी-शर्ट पहनने जैसे अन्य नियम भी बताए गए.

अशोक पंडित ने सवाल उठाया कि हिंदू-बहुल भारत में, जहां ज्यादातर कर्मचारी और ग्राहक हिंदू हैं, ऐसी कंपनी हिंदू प्रतीकों पर प्रतिबंध क्यों लगा रही है? उन्होंने इसे हिंदू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया. उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर नया विवाद छिड़ गया है. हालांकि कंपनी ने इस मामले पर सफाई पेश करते हुए लिखा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और वर्तमान में कोई भी गाइडलाइंस कर्मचारियों को प्रतिबिंबित नहीं करता है. हालांकि लोग अभी भी उनकी बात मानने के लिए तैयार नहीं है.